अलवर, संवाददाता: मुकेश कुमार शर्मा
Bhiwadi drug bust ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि औद्योगिक क्षेत्रों की आड़ में किस तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर का नशे का कारोबार फल-फूल रहा है। राजस्थान के औद्योगिक शहर भिवाड़ी में रविवार को सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई ने न केवल करोड़ों के अवैध केमिकल जब्त किए, बल्कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया। यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जब्त किए गए केमिकल का इस्तेमाल नींद की दवाओं और नशीली गोलियों के निर्माण में किया जाता है, जिनकी सप्लाई देश के कई राज्यों के साथ-साथ विदेशों तक होनी थी।
कहरानी औद्योगिक क्षेत्र में छापेमारी
भिवाड़ी के कहरानी औद्योगिक क्षेत्र में की गई यह कार्रवाई पूरी तरह गुप्त सूचना पर आधारित थी। सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि एपीएल फार्मकिम नाम की एक फैक्ट्री में अवैध रूप से नशीले केमिकल का निर्माण किया जा रहा है। bhiwadi drug bust के तहत जब संयुक्त टीम ने फैक्ट्री पर छापा मारा, तो अंदर का नज़ारा चौंकाने वाला था। फैक्ट्री में न तो कोई वैध रिकॉर्ड मौजूद था और न ही दवा निर्माण से जुड़ा कोई लाइसेंस।
जब्त किए गए केमिकल और उनकी कीमत
छापेमारी के दौरान टीम ने करीब 22 किलोग्राम प्रतिबंधित और नशीले सक्रिय केमिकल जब्त किए। जांच एजेंसियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन केमिकल की कीमत लगभग ₹32.56 करोड़ आंकी गई है। bhiwadi drug bust की यह बरामदगी इसलिए भी अहम है क्योंकि इतनी कम मात्रा में जब्त किए गए केमिकल से लाखों नशीली गोलियां तैयार की जा सकती थीं, जिससे युवाओं को बड़े पैमाने पर नशे की गिरफ्त में लाया जा सकता था।
कैसे चल रहा था अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क
जांच में सामने आया कि फैक्ट्री में अलप्राजोलम, टेमाजेपाम और पैराजेपाम जैसे प्रतिबंधित घटकों का अवैध उत्पादन किया जा रहा था। इन केमिकल का उपयोग नींद की दवाओं और नशीली टैबलेट बनाने में होता है। bhiwadi drug bust की जांच में यह भी पता चला कि आरोपी फैक्ट्री के भीतर छिपी हुई मशीनों का इस्तेमाल करते थे, ताकि बाहर से किसी को शक न हो। पूरा सेटअप बेहद पेशेवर और योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया था।
अमेरिका और कनाडा तक सप्लाई की साजिश
जांच एजेंसियों के अनुसार, तैयार की गई नशीली गोलियों को पहले गुजरात के डीलरों तक पहुंचाया जाना था। इसके बाद इन्हें देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ अमेरिका और कनाडा तक सप्लाई करने की योजना थी। bhiwadi drug bust ने इस बात की पुष्टि की है कि यह सिर्फ स्थानीय या अंतरराज्यीय नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का हिस्सा था, जो भारत को ट्रांजिट और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में इस्तेमाल कर रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका
इस कार्रवाई में उत्तर प्रदेश के तीन केमिकल इंजीनियर—कृष्णा, अंशुल शास्त्री और अखिलेश मौर्य—को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में उन्होंने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। bhiwadi drug bust की जांच में सामने आया कि ये तीनों आरोपी तकनीकी विशेषज्ञता के कारण इस नेटवर्क का अहम हिस्सा थे और केमिकल मिश्रण तैयार करने की जिम्मेदारी इन्हीं पर थी।
अवैध फैक्ट्री और लाइसेंस का सच
पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपियों ने करीब एक महीने पहले ही कहरानी क्षेत्र में बंद पड़ी इस फैक्ट्री को किराए पर लिया था। न तो फैक्ट्री पंजीकृत थी और न ही दवा निर्माण से संबंधित कोई वैध अनुमति ली गई थी। bhiwadi drug bust यह भी दिखाता है कि कैसे औद्योगिक क्षेत्रों में खाली पड़ी फैक्ट्रियों का दुरुपयोग कर अवैध गतिविधियां चलाई जाती हैं, जिन पर समय रहते कार्रवाई जरूरी है।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई
कार्रवाई के दौरान जिला औषधि नियंत्रक की टीम और एफएसएल विशेषज्ञों ने मौके से सैंपल लेकर विस्तृत जांच शुरू कर दी है। इन सैंपल्स की रिपोर्ट से यह तय होगा कि और कितनी मात्रा में नशीले पदार्थ तैयार किए जा चुके थे। bhiwadi drug bust के बाद जांच एजेंसियां अब नेटवर्क की पिछली और आगे की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई हैं।
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