भारत। 114 राफेल लड़ाकू विमान सौदा: पूरी खबर एक नजर में 114 राफेल लड़ाकू विमान सौदा भारत के रक्षा इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण सौदा बनने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, भारत और फ्रांस फरवरी 2026 में ही इस डील पर औपचारिक हस्ताक्षर कर सकते हैं। यह सौदा भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल ताकत, तकनीकी क्षमता और सामरिक बढ़त को कई गुना बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
भारत क्यों कर रहा है अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा
114 राफेल लड़ाकू विमान सौदा इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि भारत की वायुसेना लगातार बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रही है। चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर आधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक चुनौती बन चुकी है।
भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन क्षमता
भारतीय वायुसेना को आदर्श रूप से 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में यह संख्या लगभग 30 के आसपास है। 114 राफेल लड़ाकू विमान सौदा इस गैप को भरने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
114 राफेल लड़ाकू विमान सौदे की पृष्ठभूमि
पिछले वर्ष भारतीय वायुसेना ने रक्षा मंत्रालय को 114 आधुनिक लड़ाकू विमानों की आवश्यकता को लेकर औपचारिक प्रस्ताव भेजा था। कई विकल्पों पर विचार के बाद राफेल को सबसे उपयुक्त प्लेटफॉर्म माना गया।
भारत-फ्रांस रक्षा संबंधों का इतिहास
114 राफेल लड़ाकू विमान सौदा भारत-फ्रांस के दशकों पुराने रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देगा। फ्रांस लंबे समय से भारत का भरोसेमंद रक्षा साझेदार रहा है और उसने हमेशा संवेदनशील तकनीक साझा करने में सहयोग किया है।
राफेल लड़ाकू विमान की तकनीकी खूबियां
राफेल एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो हवा-से-हवा, हवा-से-जमीन और समुद्री मिशनों में सक्षम है। इसमें AESA रडार, मेटियोर मिसाइल, स्कैल्प क्रूज मिसाइल और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम मौजूद हैं। 114 राफेल लड़ाकू विमान सौदा भारत को तकनीकी रूप से कई कदम आगे ले जाएगा।
पहले खरीदे गए 36 राफेल से क्या सीखा भारत ने
भारत पहले ही 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीद चुका है, जो अंबाला और हाशिमारा एयरबेस पर तैनात हैं। इन विमानों ने वास्तविक परिस्थितियों में अपनी क्षमता साबित की है। इसी अनुभव के आधार पर 114 राफेल लड़ाकू विमान सौदे को आगे बढ़ाया जा रहा है।
राफेल-मरीन सौदे से नौसेना को कैसे मिली मजबूती
अप्रैल 2025 में भारत ने फ्रांस से 26 राफेल-मरीन जेट खरीदने के लिए करीब 63,000 करोड़ रुपये का समझौता किया। इस सौदे में 22 सिंगल-सीटर और 4 टू-सीटर ट्रेनिंग विमान शामिल हैं। यह डील भारतीय नौसेना की एयरक्राफ्ट कैरियर क्षमता को मजबूत करती है।
सरकार-से-सरकार समझौते का महत्व
114 राफेल लड़ाकू विमान सौदा इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट के तहत किया जाएगा। इससे भ्रष्टाचार, देरी और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाती है। सीधी डील से भारत को समयबद्ध डिलीवरी और तकनीकी सहयोग मिलेगा।
मेक इन इंडिया और टाटा-डसॉल्ट साझेदारी
यह सौदा ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के लिए भी बेहद अहम है। डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के बीच भारत में राफेल के फ्यूजलेज निर्माण का समझौता हो चुका है। इससे भारत वैश्विक एयरोस्पेस सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनेगा।
भारत की रणनीतिक स्थिति पर सौदे का असर
114 राफेल लड़ाकू विमान सौदा भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक मजबूत सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करेगा। यह सौदा चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए स्पष्ट रणनीतिक संदेश माना जा रहा है।
डिलीवरी टाइमलाइन और भविष्य की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, विमानों की डिलीवरी चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। 2030 के बाद भारतीय वायुसेना के पास आधुनिक राफेल स्क्वाड्रनों की बड़ी संख्या होगी।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से क्यों अहम है यह सौदा
114 राफेल लड़ाकू विमान सौदा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ मजबूत करेगा।
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