जयपुर | जोबनेर में श्री कर्ण नरेंद्र कृषि महाविद्यालय में विश्व मृदा दिवस के अवसर पर “स्वस्थ शहरों के लिए स्वस्थ मृदा” थीम पर एक भव्य और सार्थक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मृदा संरक्षण, प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलगुरु प्रो. डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान और विशिष्ट अतिथि प्रथम एवं पूर्व कुलगुरु प्रो. डॉ. एन. एस. राठौड़ थे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डीन, निदेशक, वैज्ञानिक, ग्रामीण किसान, कृषक महिलाएं और लगभग 150 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ और मुख्य अतिथि
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुई। मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने किसानों के लिए निःशुल्क मृदा परीक्षण सुविधा की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे पोषण प्रबंधन सटीक होगा और उत्पादन में वृद्धि होगी। डॉ. चौहान ने किसानों को “1 पेड़ माँ के नाम” अभियान से जुड़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने फसल चक्र, ड्रिप इरीगेशन, TDS–pH टेस्टिंग और वर्मी कम्पोस्ट जैसी तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने मिथेन गैस से बचाव और मृदा सुधार के लिए जिप्सम के उपयोग को अत्यंत लाभकारी बताया।
किसानों के लिए नई पहलें और तकनीक
पूर्व कुलगुरु प्रो. डॉ. एन. एस. राठौड़ ने कहा, “भूमि जीवित है, इसे बचाना हमारा कर्तव्य है।” उन्होंने बताया कि राजस्थान की मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ कम हैं, इसलिए प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग समय की आवश्यकता है। प्रो. राठौड़ ने सॉयल हेल्थ कार्ड के आधार पर खाद देने, जैविक खेती, नैनो यूरिया और किसान नवाचारों पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि इन पहल से मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ती है और उत्पादन में सुधार होता है।
प्राकृतिक खेती और मिट्टी सुधार
अधिष्ठाता डॉ. डी. के. गोठवाल ने रसायनों के अत्यधिक उपयोग को मानव स्वास्थ्य के लिए घातक बताया। निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. आर. एन. शर्मा ने कहा कि रासायनिक खाद धीरे-धीरे मिट्टी की ऊर्जा क्षमता को क्षीण कर रही है। विभागाध्यक्ष डॉ. के. के. शर्मा ने कहा कि यदि मृदा स्वस्थ होगी तो मानव और पशु स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहेगा। मिट्टी के पोषण और संरक्षक तत्वों पर ध्यान देना आवश्यक है।
वैज्ञानिक फोल्डर का विमोचन
इस अवसर पर वैज्ञानिकों द्वारा तैयार कृषि फोल्डर का विमोचन भी किया गया। यह फोल्डर किसानों को प्राकृतिक खेती, मृदा परीक्षण और पोषण प्रबंधन के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करता है। फोल्डर में मृदा सुधार, जैविक खाद, पानी की बचत और फसल चक्र से संबंधित उपयोगी जानकारियां शामिल हैं, जिससे किसानों की कृषि पद्धतियों में सुधार होगा।
विशेषज्ञों के विचार और सुझाव
विशेषज्ञों ने मिट्टी स्वास्थ्य, प्राकृतिक उर्वरक, जैविक खाद और जल संरक्षण तकनीकों पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को नियमित मृदा परीक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। रासायनिक खाद के सीमित उपयोग, कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने और मिट्टी की ऊर्जा क्षमता बनाए रखने पर बल दिया गया। इस प्रकार पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
कार्यक्रम का संचालन और भागीदारी
कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रेरणा डोगरा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. गजानंद जाट ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित लोगों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और ज्ञानवर्धक विचार साझा किए। ग्रामीण किसान, कृषक महिलाएं और छात्र-छात्राओं ने प्रश्न पूछकर कार्यक्रम को और अधिक जीवंत बनाया। सभी ने प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों पर सीख साझा की।
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