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 विजयादशमी पर हेमंत भायाजी की शुभकामनाएँ – असत्य पर सत्य की जीत का पर्व

जयपुर। विजयादशमी, जिसे दशहरा भी कहा जाता है, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक पर्व है। इस पावन अवसर पर भारतीय जनता पार्टी, राजस्थान के प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी किसान मोर्चा हेमंत भायाजी ने प्रदेशवासियों सहित सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं।

भायाजी ने कहा कि विजयादशमी केवल रावण दहन का पर्व नहीं है, बल्कि यह अच्छाई, न्याय और धर्म की जीत का संदेश देता है। भगवान श्रीराम ने जिस तरह आदर्श, साहस और सत्य के मार्ग पर चलते हुए अधर्म का अंत किया, वही प्रेरणा आज भी समाज के लिए प्रासंगिक है।

सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा

अपने संदेश में हेमंत भायाजी ने कहा कि विजयादशमी हमें यह सिखाती है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। आज के समय में जब समाज अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है, तब श्रीराम के आदर्श और मर्यादा सबसे बड़ी सीख हैं।

उन्होंने जनता से आह्वान किया कि इस पर्व को केवल उत्सव के रूप में न मनाएँ, बल्कि इसे आत्मचिंतन और आत्मसुधार का अवसर भी बनाएँ।

समाज और राष्ट्र के उत्थान की अपील

भायाजी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व सदैव ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ की भावना से काम कर रहा है। विजयादशमी जैसे पावन पर्व हमें याद दिलाते हैं कि व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए योगदान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमें इस अवसर पर यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने जीवन से नकारात्मकता, बुराइयों और विभाजन की प्रवृत्ति को दूर करेंगे। ठीक उसी तरह जैसे भगवान श्रीराम ने रावण के अहंकार का अंत किया।

परंपरा, संस्कृति और उत्सव का महत्व

विजयादशमी पूरे भारत में बड़े हर्षोल्लास से मनाई जाती है। रामलीला और रावण दहन इसके प्रमुख आकर्षण हैं। राजस्थान सहित पूरे देश में इस दिन लोगों की आस्था और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
हेमंत भायाजी ने कहा कि यह पर्व हमारी संस्कृति की गहराई और समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। हमें अपनी नई पीढ़ी को इस संस्कृति से जोड़ने की जिम्मेदारी भी उठानी होगी।

भायाजी का संदेश

अंत में हेमंत भायाजी ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे विजयादशमी पर मिलजुलकर समाज में भाईचारे, एकता और सद्भाव का संदेश फैलाएँ। उन्होंने कहा कि जब हम मिलकर अच्छाई का मार्ग अपनाएँगे, तभी वास्तविक अर्थों में दशहरे का पर्व सार्थक होगा।

 

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