टोंक जिले के किसानों के लिए इस बार की बारिश आफत बनकर आई है। खरीफ सीजन की फसलें पहले ही खराब हो चुकी थीं, अब रबी की फसलें भी अत्यधिक वर्षा के कारण खतरे में पड़ गई हैं। लगातार बारिश से कई खेतों में पानी भर गया है, जिससे सरसों और चने की फसलें बर्बादी की कगार पर हैं।जिले के कई इलाकों — विशेष रूप से निवाई, उनियारा, पीपलू और टोंक तहसील क्षेत्रों — में खेत पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया है। फसलों के सड़ने और जड़ों के गलने से उपज पर गहरा असर पड़ रहा है।किसानों का कहना है कि लगातार पानी भरने से मिट्टी की गुणवत्ता भी खराब हो रही है, जिससे आने वाले समय में खेती की लागत बढ़ेगी और उत्पादन घटेगा।
किसानों की पीड़ा — “फसलें डूब गईं, अब घर कैसे चलाएं”
कई किसानों ने बताया कि उन्होंने खरीफ में भारी नुकसान झेला था, अब रबी में भी वही स्थिति बन रही है।किसानों का कहना है कि सरकार को तुरंत गिरदावरी (फसल नुकसान का सर्वे) करवाकर मुआवजा देना चाहिए।चंद्रवीर सिंह चौहान, जिला अध्यक्ष (भाजपा)“टोंक जिले के किसान लगातार दो सीजन से नुकसान झेल रहे हैं। प्रशासन को तत्काल गिरदावरी कराकर किसानों को राहत राशि उपलब्ध करवानी चाहिए, ताकि वे फिर से खेती शुरू कर सकें।”
प्रशासन से राहत की मांग
ग्रामीण इलाकों में किसानों ने खेतों से पानी निकालने की कोशिश शुरू की है, लेकिन लगातार बारिश के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है।किसानों ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि वे आपदा राहत कोष से सहायता राशि जारी करें और कृषि विभाग के अधिकारियों को नुकसान का आकलन करने के लिए मौके पर भेजें।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी छिटपुट बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में रबी सीजन की फसलों के पूरी तरह खराब होने का खतरा और बढ़ गया है।टोंक जिले के किसानों के सामने इस समय जीविका का संकट खड़ा हो गया है। खरीफ की बर्बादी के बाद अब रबी की फसलें भी डूबने लगी हैं।किसानों की उम्मीद अब प्रशासन की ओर है — अगर समय पर गिरदावरी और मुआवजा नहीं मिला, तो आने वाले सीजन में खेती करने की स्थिति और कमजोर हो जाएगी।सरकार और स्थानीय प्रशासन के लिए यह समय है कि वे किसानों की मदद को प्राथमिकता दें और राहत कार्यों को जल्द से जल्द अमल में लाएं।
संवाददाता_केशव राज सैन
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