उदयपुर, संवाददाता: अभिषेक धींग
Teacher Sweater Distribution केवल एक सहायता कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का प्रतीक बनकर सामने आया है। शीतलहर के बढ़ते प्रकोप के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति लगातार प्रभावित हो रही है। इसी समस्या को समझते हुए उदयपुर जिले के कानोड़ क्षेत्र में एक सराहनीय पहल देखने को मिली। कड़ाके की ठंड में छोटे बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना कठिन हो जाता है।
शीतलहर से जूझते ग्रामीण स्कूल
उदयपुर जिले के कानोड़ निकटवर्ती विद्यालयों में शीतलहर का असर साफ दिखाई देने लगा है। सुबह के समय ठंडी हवाओं और कम तापमान के कारण कई छात्र-छात्राओं का विद्यालय आना मुश्किल हो रहा था। विशेष रूप से प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थी इस ठंड में सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। Teacher Sweater Distribution से पहले कई बच्चे केवल ठंड के कारण नियमित रूप से स्कूल नहीं आ पा रहे थे।
शवपुरा विद्यालय में स्वेटर वितरण
Teacher Sweater Distribution की यह पहल राजकीय प्राथमिक विद्यालय शवपुरा, ग्राम पंचायत लुणदा, जिला उदयपुर में कार्यरत अध्यापिका मयूरी कूदाल द्वारा की गई। उन्होंने विद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं को स्वेटर वितरित किए, ताकि ठंड के कारण उनकी पढ़ाई बाधित न हो। एक शिक्षक का यह रूप केवल पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चों की मूल जरूरतों को समझना भी उसका दायित्व होता है।
विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया और संकल्प
स्वेटर वितरण के बाद विद्यालय परिसर में खुशी का माहौल देखने को मिला। बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और उत्साह साफ नजर आया, जो Teacher Sweater Distribution की सफलता को दर्शाता है। स्वेटर मिलने के बाद विद्यार्थियों ने नियमित रूप से विद्यालय आने का संकल्प भी लिया। Teacher ने बच्चों के मन से ठंड का डर कम कर दिया और शिक्षा के प्रति उनका भरोसा बढ़ाया।
शिक्षा के प्रति समर्पण की मिसाल
Teacher Sweater Distribution यह दर्शाता है कि एक शिक्षक बच्चों के लिए केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि प्रेरणा का केंद्र भी होता है। ऐसी पहलें बच्चों के जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं। स्थानीय विद्यालय खेलकूद प्रतियोगिताओं और शैक्षणिक गतिविधियों में हमेशा से अग्रणी रहा है।
ग्रामीणों की सराहना
Teacher Sweater Distribution के इस सराहनीय कार्य के लिए ग्रामीणों ने अध्यापिका मयूरी कूदाल का आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे शिक्षक समाज के लिए प्रेरणा होते हैं। इस पहल से यह भी स्पष्ट हुआ कि जब शिक्षा और समाज एक साथ आते हैं, तो बच्चों का भविष्य और अधिक सुरक्षित बनता है। ऐसी पहलें यह संदेश देती हैं कि यदि हर शिक्षक और समाज मिलकर बच्चों की मूल जरूरतों का ध्यान रखे, तो कोई भी मौसम शिक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बन सकता।
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