टोंक, संवाददाता: उमाशंकर शर्मा
स्वस्ति भूषण माताजी का संदेश एक बार फिर जैन समाज और श्रद्धालुओं के लिए आत्ममंथन का विषय बना। स्वस्तिधाम प्रणेती गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी का संसंघ वर्तमान में जहाजपुर से पीननी–पीपलू की ओर विहाररत है। इस आध्यात्मिक यात्रा के क्रम में माता जी का विहार राजमहल से होते हुए टोडारायसिंह क्षेत्र में हुआ।
टोडारायसिंह में समाजजनों द्वारा अगवानी
समाज प्रवक्ता मुकुल जैन ने जानकारी दी कि माता जी ने राजमहल से विहार कर डॉ. नाथू सिंह गुर्जर के फार्म हाउस तक पद विहार किया। यहां टोडा जैन समाज अध्यक्ष संत कुमार जैन एवं मुकेश गुर्जर सालग्यावास द्वारा माता जी की भावपूर्ण अगवानी की गई। स्वस्ति भूषण माताजी का संदेश सुनने के लिए समाजजनों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
मंगलाचरण से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
इस अवसर पर संघहस्त ब्रह्मचारिणी प्रियंका दीदी ने मंगलाचरण कर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं ने संयम, साधना और शांति के भाव के साथ गुरु मां के प्रवचन का श्रवण किया। स्वस्ति भूषण माताजी का संदेश सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रावक उपस्थित रहे।
गुरु मां का प्रेरक उद्बोधन
अपने उद्बोधन में परम पूजनीय गुरु मां ने जीवन मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य को सबसे पहले अपने भीतर झांकना चाहिए। स्वस्ति भूषण माताजी का संदेश स्पष्ट था—यदि जीवन को स्वर्ग बनाना है तो अहंकार को त्यागना ही होगा। अहंकार ही वह बीज है, जो मनुष्य के सुख और शांति को नष्ट कर देता है।
अहंकार को बताया जीवन का सबसे बड़ा शत्रु
गुरु मां ने कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है। जिसने अहंकार को भुला दिया, समझो उसके जीवन में शांति आ गई। अहंकार व्यक्ति को दूसरों से दूर कर देता है और सहयोग की भावना को समाप्त कर देता है। स्वस्ति भूषण माताजी का संदेश अहंकार से मुक्त जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
कौरव–पांडव उदाहरण से दी सीख
गुरु मां ने महाभारत का उदाहरण देते हुए बताया कि कौरवों ने पांडवों का उपहास किया, उनकी हंसी उड़ाई और उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास किया। वही हंसी अंततः कौरवों के विनाश का कारण बनी। स्वस्ति भूषण माताजी का संदेश यही सिखाता है कि किसी के संकट पर हंसना नहीं चाहिए, क्योंकि यह विनाश का कारण बन सकता है।
सहयोग और करुणा का महत्व
गुरु मां ने कहा कि मन के अंदर सहयोग की भावना होनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति संकट में हो तो उसके प्रति करुणा रखनी चाहिए, न कि उपहास। दूसरों का मजाक उड़ाना कई बार खतरनाक साबित होता है। स्वस्ति भूषण माताजी का संदेश समाज में सह-अस्तित्व, सहयोग और मानवीय संवेदना को मजबूत करने का आह्वान करता है।
जैन भवन में भव्य मंगल प्रवेश की तैयारी
जानकारी के अनुसार रविवार को माता जी का जैन भवन टोडारायसिंह में भव्य मंगल प्रवेश होगा। इसे लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह है और तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। स्वस्ति भूषण माताजी का संदेश सुनने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
पद विहार में उमड़ा श्रावकों का जनसैलाब
इस विहार के दौरान टोडारायसिंह, पीपलू, राजमहल, बोटुंदा, देवली सहित कई क्षेत्रों से सैकड़ों श्रावकों ने संघ के साथ पद विहार किया। यह दृश्य जैन धर्म की एकता, अनुशासन और श्रद्धा का अनुपम उदाहरण बना। स्वस्ति भूषण माताजी का संदेश श्रद्धालुओं के हृदय में गहरी छाप छोड़ता नजर आया।
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