केंद्र सरकार ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा सुधारात्मक कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की है कि पूरे भारत में हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट यानी HTA रिसोर्स सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन सेंटरों का उद्देश्य नई दवाओं, मशीनों, जांच तकनीकों और इलाज के तरीकों का वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन करना होगा ताकि यह पता चल सके कि कौन-सी तकनीक वाकई असरदार और किफायती है।
नई स्वास्थ्य तकनीकों की तेजी से हो रही बढ़ोतरी
मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में हेल्थ सेक्टर में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। चाहे नई जांच विधियां हों, महंगी मेडिकल मशीनें हों या फिर आधुनिक इलाज, सबकुछ लगातार बदल रहा है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है कि ये तकनीकें कितनी उपयोगी हैं, कितनी सस्ती हैं और क्या ये आम जनता के लिए फायदेमंद साबित होंगी।
देशभर में अलग-अलग क्षेत्रों में खुलेंगे HTA सेंटर
सरकार द्वारा जारी मसौदे के अनुसार वर्ष 2025-26 में देश के विभिन्न हिस्सों में इन HTA रिसोर्स सेंटरों की स्थापना की जाएगी। ये सेंटर नई स्वास्थ्य तकनीकों का परीक्षण करेंगे, रिपोर्ट तैयार करेंगे और सरकार को वैज्ञानिक आधार पर नीतियां बनाने में मदद करेंगे। ऐसे कदम से न सिर्फ नीति-निर्माण में पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश भी अधिक प्रभावशाली होगा।
केंद्र और राज्यों की हेल्थ नीतियों को मिलेगी दिशा
HTA केंद्रों की शुरुआत से न सिर्फ केंद्र सरकार, बल्कि राज्य सरकारों और बड़े अस्पतालों को भी लाभ मिलेगा। ये सेंटर नीतियों, प्रशिक्षण और कार्यशालाओं से जुड़े दस्तावेज तैयार करेंगे ताकि स्वास्थ्य कार्यक्रमों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा सके। इससे राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को भी सही दिशा मिलेगी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
क्यों जरूरी है HTA? जानें मुख्य कारण
कई बार अस्पताल नई तकनीकों को अपनाते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि वे महंगी, अप्रभावी या सीमित उपयोग वाली हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए HTA सेंटर बेहद उपयोगी साबित होंगे। ये केंद्र हर नई तकनीक की प्रभावशीलता, लागत, उपयोगिता और जनहित में उसकी भूमिका का मूल्यांकन करेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि देश का हर बड़ा स्वास्थ्य निर्णय डेटा और रिसर्च के आधार पर लिया जाए।
रुपये बचाने में मददगार साबित हुई HTA प्रक्रिया
आईसीएमआर-सीआरएचसीएम मुंबई की निदेशक डॉ. मनीषा मडकईकर के अनुसार HTA प्रक्रिया ने पहले ही कई सरकारी कार्यक्रमों को फायदा पहुंचाया है। उदाहरण के तौर पर सिकलसेल जांच के लिए पहले एक किट पर 300 रुपये से अधिक खर्च होता था, जबकि अब सिर्फ 50 रुपये में उपकरण उपलब्ध हैं। इसी तरह टीबी, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के लिए भी कम कीमत पर नई जांच विधियां उपलब्ध कराई गई हैं।
नई दवाओं और तकनीकों का वैज्ञानिक परीक्षण होगा
एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि हर नया HTA केंद्र दवाओं, इलाज के तरीकों और नई तकनीकों का वैज्ञानिक आकलन करेगा। ये केंद्र ट्रेनिंग, सेमिनार और ऑनलाइन कोर्स के माध्यम से राज्यों और केंद्र को जागरूक करेंगे ताकि स्वास्थ्य नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इसके अलावा सरल भाषा में पॉलिसी ब्रीफ तैयार किए जाएंगे ताकि सरकार को यह निर्णय लेने में आसानी हो कि किन तकनीकों को अपनाया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य क्षेत्र की वैज्ञानिक और आधुनिक दिशा
सरकार का मानना है कि HTA रिसोर्स सेंटर स्थापित होने से देश की स्वास्थ्य नीतियाँ मजबूत, आधुनिक और वैज्ञानिक बनेंगी। इससे यह तय करना आसान होगा कि कौन-सी तकनीकें जनहित में उपयुक्त हैं और किन पर निवेश करना आवश्यक है। अंततः यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती, सुरक्षित और प्रभावी बनाएगा।
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