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सड़क के लिए बच्चों का संघर्ष: गुमानगंज गांव के छात्र-छात्राएं जिला कलेक्टर से मिले, बोले — “अब नहीं तो आंदोलन”

टोंक, संवाददाता: केशव राज सैन

 

टोंक जिले के गुमानगंज गांव के छात्र-छात्राओं ने सोमवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर अपनी सड़क निर्माण की मांग जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल के सामने रखी।गांव के बच्चों ने स्कूल जाने की बजाय अपने परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर कहा —“हम पढ़ना चाहते हैं, लेकिन सड़क न होने से रोज़ कीचड़ और पानी से होकर गुजरना पड़ता है।”कलेक्टर ने बच्चों की बात सुनते हुए सड़क निर्माण को लेकर आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

 

गांव से स्कूल तक का रास्ता बना संघर्ष की डगर

ग्राम पंचायत शिवराजपुरा के अंतर्गत आने वाले गुमानगंज गांव की स्थिति बेहद दयनीय है।गांव से ककोड़ स्थित विद्यालय तक जाने वाले तीनों रास्तों पर बरसात का पानी और कीचड़ भरा हुआ है।लगभग तीन किलोमीटर का रास्ता छात्रों के लिए रोज़ का इम्तिहान बन गया है।कई बार छात्र रास्ते में फिसलकर गिर जाते हैं या फिर बरसाती पानी में फंस जाते हैं।छात्रा मोनिका मीणा ने बताया —“रास्ते में कीचड़ और पानी इतना होता है कि कई बार स्कूल पहुंचने में दो घंटे लग जाते हैं।अंधेरा होने के बाद घर लौटना भी खतरे से खाली नहीं होता।”

 

टॉवर पर चढ़कर किया था विरोध, अब कलेक्टर से की शिकायत

एक सप्ताह पहले गुमानगंज गांव के स्कूली बच्चों ने अपनी मांग मनवाने के लिए बिजली के निर्माणाधीन टॉवर पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन किया था।उस समय बच्चों ने चेतावनी दी थी कि यदि सात दिन में सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो वे आंदोलन तेज करेंगे।प्रदर्शन के बाद पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर समझाइश दी थी और कहा था कि जल्द ही समाधान निकाला जाएगा।लेकिन जब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठा, तो बच्चों ने सोमवार को कलेक्टर कार्यालय का रुख किया।

 

ग्रामीणों और छात्रों की व्यथा — “कई बार गुहार लगाई, कोई सुनवाई नहीं”

गांव के ग्रामीण मनराज मीणा, श्योराज मीणा और प्रधान गुर्जर ने बताया किउन्होंने अपनी समस्या कई बार MLA, MP और सरपंच तक पहुंचाई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।“हम सड़क के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं।हमारे बच्चे शिक्षा से वंचित न रहें, इसके लिए हमने बार-बार प्रशासन से गुहार लगाई,पर नतीजा हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला।”

 

कलेक्टर का आश्वासन — जल्द बनेगा समाधान

जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने बच्चों और ग्रामीणों से मुलाकात की और कहा कि“गांव को सड़क से जोड़ने के लिए संबंधित विभागों से चर्चा की जाएगी।इस दिशा में जल्द ही सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।”उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों की समस्या प्रशासन की प्राथमिकता सूची में है।खतरे से भरा रास्ता — जंगल, कीचड़ और पानी का डरगांव के तीन रास्तों में से एक रास्ता वन विभाग के क्षेत्र (क्लोज़र) से होकर गुजरता है, जहां वन्य जीवों का खतरा बना रहता है।बरसात के मौसम में हालात और बिगड़ जाते हैं, जिससे छात्रों का स्कूल पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है।

 

ग्रामीण बोले — “सड़क बनेगी तो बदलेगी किस्मत”

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार या पंचायत की किसी योजना मेंगांव को सड़क से जोड़ दिया जाए, तो यह केवल छात्रों के लिए नहीं,बल्कि पूरे गांव के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।गुमानगंज गांव के बच्चों का यह संघर्ष केवल सड़क का नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार और बुनियादी सुविधाओं की मांग का प्रतीक है।जहां बच्चे स्कूल जाने के लिए टॉवर पर चढ़ने को मजबूर हों, वहां यह सवाल उठना लाज़मी है —“आज़ादी के 78 साल बाद भी क्या हर गांव विकास से जुड़ पाया है?”अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन अपने वादे को कितनी जल्दी पूरा करता है।

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