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Priyanka Gandhi Tea Row

Priyanka Gandhi Tea Row: 50 करोड़ लोगों का विरोध, CPM का तीखा हमला और विपक्ष में दरार | बड़ा विवाद

Priyanka Gandhi Tea Row उस वक्त चर्चा में आया जब कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi लोकसभा स्पीकर द्वारा आयोजित चाय पार्टी में शामिल हुईं, जहां प्रधानमंत्री Narendra Modi भी मौजूद थे, जबकि उसी समय देशभर में करीब 50 करोड़ लोग एक विवादित कानून के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध जता रहे थे, इस घटनाक्रम ने विपक्षी एकता और सरकार-विरोधी रुख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए और राजनीतिक गलियारों में इसे गंभीर संकेत के रूप में देखा जाने लगा।

 

Priyanka Gandhi Tea Row पर CPM का आरोप 

Priyanka Gandhi Tea Row को लेकर CPI(M) के राज्यसभा सांसद John Brittas ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रियंका गांधी का प्रधानमंत्री के साथ चाय पार्टी में शामिल होना विपक्ष के सामूहिक स्टैंड के खिलाफ है, उन्होंने इसे विपक्ष का नैतिक पतन और भारतीय लोकतंत्र पर काला धब्बा बताया और सवाल उठाया कि जब कई दलों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया था, तब प्रियंका गांधी किस अधिकार से वहां मौजूद रहीं।

 

Priyanka Gandhi Tea Row और 50 करोड़ गरीबों का मुद्दा 

Priyanka Gandhi Tea Row को ब्रिटास ने सीधे तौर पर उस कानून से जोड़ा जो कथित तौर पर करीब 50 करोड़ गरीबों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है, उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार रोजगार गारंटी जैसे कानूनों को कमजोर कर रही है और दूसरी ओर विपक्षी नेताओं का सत्ता पक्ष के साथ चाय पर बैठना बेहद विचलित करने वाला दृश्य है, उनका आरोप था कि ऐसे समय में राजनीतिक सौहार्द का प्रदर्शन जनता के संघर्ष का अपमान है और इससे गलत संदेश जाता है।

 

Priyanka Gandhi Tea Row: विपक्ष का बहिष्कार क्यों 

Priyanka Gandhi Tea Row इसलिए भी बड़ा मुद्दा बना क्योंकि DMK के वरिष्ठ नेता टी.आर. बालू और कनिमोझी, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी ने इस चाय पार्टी का पूरी तरह बहिष्कार किया था, ब्रिटास ने कहा कि जब इतने दलों ने एकजुट होकर कार्यक्रम से दूरी बनाई, तब प्रियंका गांधी की मौजूदगी विपक्षी रणनीति को कमजोर करती है और मीडिया को उनसे इस पर जवाब मांगना चाहिए।

 

Priyanka Gandhi Tea Row और VBGRG बिल विवाद 

Priyanka Gandhi Tea Row के संदर्भ में ब्रिटास ने VBGRG बिल को अभूतपूर्व और अलोकतांत्रिक करार देते हुए कहा कि इसे बिना पर्याप्त बहस के कुछ ही घंटों में दोनों सदनों से पारित कराया गया, जो संसदीय परंपराओं के खिलाफ है, उन्होंने उदाहरण दिया कि राजीव गांधी के दौर में बोफोर्स जैसे गंभीर मुद्दे पर भी संसद में लंबी चर्चा हुई थी, लेकिन मौजूदा सरकार ने बहस से बचने का रास्ता चुना।

 

Priyanka Gandhi Tea Row के सियासी मायने 

Priyanka Gandhi Tea Row भारतीय राजनीति में विपक्ष की एकजुटता, नैतिकता और रणनीति पर गहरे सवाल छोड़ता है, जहां एक ओर गरीबों और मजदूरों के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की मुलाकातें जनता के बीच भ्रम पैदा करती हैं, CPM का मानना है कि प्रियंका गांधी की मौजूदगी ने विपक्ष के संघर्ष को कमजोर किया और आने वाले समय में यह विवाद INDIA गठबंधन की राजनीति पर असर डाल सकता है।

 

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