किसान महापंचायत ने सरकार को सौंपा ज्ञापन
पीपलू उपखंड कार्यालय पर शुक्रवार को किसान महापंचायत के बैनर तले किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंशिक धरना प्रदर्शन किया। यह आंदोलन युवा प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर चौधरी के नेतृत्व में हुआ। किसानों ने राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान किसान महापंचायत जिला अध्यक्ष गोपीलाल जाट, तहसील अध्यक्ष दुलाराम, निवाई अध्यक्ष दशरथ सिंह चौहान, और कई अन्य किसान नेता मौजूद रहे। प्रदर्शन में शंकर लाल चौधरी (आजमपुरा), सीताराम, कैलाश, रामकरण, गणेश, किशन लाल, राकेश, गोपाल, रमेश, आसाराम और शैतान सिंह सहित सैकड़ों किसान शामिल हुए।
फसल मुआवजा और बीमा क्लेम की मांग
किसानों ने ज्ञापन में बताया कि हाल ही में हुई प्राकृतिक आपदाओं और सूअर के हमलों से क्षेत्र की फसलें बर्बाद हो गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को आपदा राहत कोष से उचित मुआवजा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्लेम राशि दिलाए। किसानों ने यह भी कहा कि फसलों को नष्ट करने वाले आवारा सूअरों से बचाव के लिए सरकार ठोस कदम उठाए।
क्रय-विक्रय सहकारी समिति खोलने की मांग
किसानों ने बताया कि पीपलू उपखंड मुख्यालय होने के बावजूद यहां क्रय-विक्रय सहकारी समिति (Cooperative Society) का संचालन नहीं हो रहा है। इससे किसानों को कृषि आदान (बीज, खाद आदि) खरीदने के लिए टोंक तक जाना पड़ता है। किसानों ने मांग की कि पीपलू में समिति खोलने का प्रस्ताव तैयार कर जयपुर स्थित रजिस्ट्रार सहकारी समितियों को भेजा जाए।
काजवे और सड़क निर्माण कार्य शुरू करने की मांग
किसान नेताओं ने कहा कि किसान महापंचायत की लगातार मांग के बाद राज्य सरकार ने बनास नदी पर डोडवाड़ी से बोरदा तक काजवे और सड़क निर्माण के लिए ₹25 करोड़ आवंटित किए थे, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा निरीक्षण तो कर लिया गया, लेकिन काम में देरी से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गौशालाओं में बेसहारा पशुओं को रखने की अपील
किसानों ने मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेशों की पालना करते हुए गौशालाओं में 10% बाहरी बेसहारा पशुओं को रखने के निर्देशों का कड़ाई से पालन करवाने की मांग की। उनका कहना था कि सड़कों पर घूमते पशु किसानों की फसलें नष्ट कर रहे हैं।
भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन की मांग
ज्ञापन में किसानों ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून में ग्रामीण क्षेत्रों में 4 गुना और शहरी क्षेत्रों में 2 गुना मुआवजा दिया जाए।
साथ ही सिंचाई परियोजनाओं और पेयजल योजनाओं से प्रभावित परिवारों को समान मुआवजा मिले, और मुआवजा राशि अधिग्रहण के समय की महंगाई दर के अनुसार तय की जाए।
पुराने समझौतों की पालना की मांग
किसानों ने यह भी याद दिलाया कि 28 अप्रैल 2025 को टोंक जिला कलेक्टर कार्यालय पर हुए अनिश्चितकालीन धरने के समझौते की पालना अभी तक नहीं हुई है। उन्होंने राज्य सरकार से उस समझौते की पालना सुनिश्चित करने की मांग की।





