जयपुर | Panchayat Elections SC Order के तहत सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव तय समय सीमा के भीतर कराए जाएं। अदालत ने कहा कि पूरी चुनावी प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 से पहले हर हाल में पूरी होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि परिसीमन या पुनर्गठन की प्रक्रिया को चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला क्यों अहम है
Panchayat Elections SC Order इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह सीधे तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संविधान के अनुच्छेद 243 से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनाव समय पर होना जनता के संवैधानिक अधिकार का हिस्सा है।
ग्रामीणों ने याचिका क्यों दायर की थी
रेवेन्यू गांव सिंहानिया सहित कई ग्रामीणों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राज्य सरकार द्वारा किए गए पंचायत परिसीमन और पुनर्गठन को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके गांवों को दूर-दराज स्थित ग्राम पंचायतों से जोड़ दिया गया है।
परिसीमन को लेकर क्या थीं आपत्तियां
ग्रामीणों ने दावा किया कि नए परिसीमन में भौगोलिक कठिनाइयों, दूरी और सड़क संपर्क की अनदेखी की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया और प्रशासनिक सुविधा के बजाय मनमानी की गई।
चुनाव टालने पर SC की सख्त चेतावनी
Panchayat Elections SC Order में सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि चुनाव में देरी लोकतंत्र को कमजोर करती है। अदालत ने यह दोहराया कि राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि पंचायत-निकाय चुनाव समय पर कराए जाएं।
राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश की पृष्ठभूमि
इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक पूरे किए जाएं। साथ ही परिसीमन प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी करने का आदेश भी दिया गया था।
राज्य सरकार का पक्ष और कोर्ट में दलील
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि परिसीमन प्रक्रिया समय पर पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची तैयार करने के निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं।
परिसीमन प्रक्रिया कैसे पूरी की गई
सरकार ने स्पष्ट किया कि परिसीमन केवल दूरी के आधार पर नहीं किया जाता। इसमें जनसंख्या, प्रशासनिक व्यवहार्यता, स्थानीय जरूरतें और जिला कलेक्टर स्तर की रिपोर्टों को शामिल किया जाता है। अंतिम निर्णय कैबिनेट स्तर पर अनुमोदन के बाद लिया जाता है।
चुनाव आयोग की भूमिका और अगला कदम
Panchayat Elections SC Order के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका अहम हो गई है। मतदाता सूची, आरक्षण रोस्टर और चुनाव कार्यक्रम जल्द घोषित किए जाने की संभावना है।
पंचायती राज व्यवस्था पर फैसले का प्रभाव
यह फैसला पंचायती राज व्यवस्था को मजबूती देता है। इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि लोकतंत्र की जड़ पंचायत स्तर से मजबूत होनी चाहिए। चुनाव में देरी को अब न्यायिक संरक्षण नहीं मिलेगा।
लोकतंत्र और संविधान के नजरिए से आदेश
Panchayat Elections SC Order संविधान के मूल सिद्धांतों के अनुरूप है। यह आदेश राज्य सरकारों को यह याद दिलाता है कि स्थानीय निकाय चुनाव कोई विकल्प नहीं बल्कि संवैधानिक अनिवार्यता हैं।
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