पंजाब। Operation Sindoor Hero श्रवण सिंह एक 10 वर्षीय बालक हैं, जो पंजाब के फिरोजपुर जिले के सीमावर्ती गांव चक तरां वाली में रहते हैं। ऑपरेशन सिंदूर का बाल वीर की कहानी आज पूरे देश में प्रेरणा बन चुकी है। इतनी कम उम्र में उन्होंने जो साहस दिखाया, वह बड़े-बड़े योद्धाओं के लिए भी मिसाल है। उनके जज़्बे ने यह साबित कर दिया कि देशसेवा उम्र नहीं, हिम्मत देखती है।
फिरोजपुर के छोटे सिपाही की शुरुआत
ऑपरेशन सिंदूर का वीर बालक श्रवण सिंह का बचपन आम बच्चों जैसा नहीं था। जहां बच्चे खेलने-कूदने में समय बिताते हैं, वहीं श्रवण सिंह सीमा पर तैनात जवानों की मदद को अपना कर्तव्य मान चुके थे। सीमावर्ती इलाके में रहकर उन्होंने सैनिकों की कठिन परिस्थितियों को बहुत करीब से देखा।
बॉर्डर पर ऑपरेशन सिंदूर का बाल वीर की भूमिका
मई 2025 में शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ऑपरेशन सिंदूर का छोटा सिपाही ने अहम जिम्मेदारी निभाई। भारत-पाक सीमा पर तनाव चरम पर था। दुश्मन के ड्रोन लगातार निगरानी कर रहे थे। ऐसे माहौल में श्रवण सिंह साइकिल पर चाय, लस्सी और जरूरी सामान लेकर अग्रिम चौकियों तक पहुंचते थे।
ड्रोन खतरे के बीच ऑपरेशन सिंदूर का छोटा सिपाही की बहादुरी
Operation Sindoor Hero ने कभी डर को अपने रास्ते में नहीं आने दिया। ड्रोन हमले का खतरा हर पल मंडरा रहा था। फिर भी श्रवण सिंह निडर होकर बॉर्डर की ओर निकल पड़ते थे। उनका यह साहस जवानों के लिए मनोबल बढ़ाने वाला था।
सेना के जवानों के लिए बना ऑपरेशन सिंदूर का बहादुर बच्चा
Operation Sindoor Hero सिर्फ रसद नहीं, बल्कि उम्मीद लेकर पहुंचते थे। जवानों के लिए चाय और लस्सी सिर्फ पेय नहीं, बल्कि घर की याद और अपनापन था। श्रवण सिंह की मौजूदगी से सैनिकों को भावनात्मक ताकत मिलती थी।
राष्ट्रपति से मिला राष्ट्रीय सम्मान
Operation Sindoor Hero को 26 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वयं श्रवण सिंह को यह सम्मान प्रदान किया। यह पुरस्कार उनकी असाधारण बहादुरी और सेवा भावना का प्रतीक है।
Operation Sindoor Hero से देश क्या सीखे
ऑपरेशन सिंदूर का बहादुर बच्चा हमें सिखाता है कि साहस उम्र नहीं देखता। श्रवण सिंह की कहानी बताती है कि देशभक्ति सिर्फ वर्दी से नहीं, बल्कि दिल से होती है। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनेगा।
क्यों खास है प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार
यह पुरस्कार देश के असाधारण बच्चों को पहचान देने का माध्यम है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार उन बच्चों को दिया जाता है, जिन्होंने साहस, सामाजिक सेवा, नवाचार या संस्कृति के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया हो।
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें
फिरोजपुर (पंजाब) से जुड़ी ऐसी ही देशभक्ति, साहस और प्रेरणा से भरी बड़ी खबरें, ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े जमीनी अपडेट, सीमा पर तैनात जवानों की कहानियां, राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित नन्हे नायकों की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट, ग्राउंड रिपोर्ट, फोटो-वीडियो और भरोसेमंद विश्लेषण सबसे पहले पाने के लिए हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें।
Instagram:
https://instagram.com/enewsbharat
Facebook:
https://facebook.com/enewsbharat
X (Twitter):
https://x.com/eNewsRajasthan
YouTube (Subscribe):
https://youtube.com/@enewsbharat
यहां आपको मिलेंगी ऑपरेशन सिंदूर के छोटे सिपाही श्रवण सिंह जैसे असली हीरोज की कहानियां, बॉर्डर एरिया से ग्राउंड रिपोर्ट, भारतीय सेना से जुड़ी मानवीय खबरें, राष्ट्रीय सम्मान पाने वाले बच्चों की प्रेरणादायक दास्तानें और देश के कोने-कोने से ऐसी खबरें जो गर्व से सीना चौड़ा कर दें।
eNewsBharat के साथ जुड़े रहें
ऑपरेशन सिंदूर का छोटा सिपाही श्रवण सिंह, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025, सीमा पर सेवा करने वाले गुमनाम नायक, देशभक्ति से जुड़ी हर अहम खबर और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाली सच्ची कहानियां सबसे पहले जानने के लिए eNewsBharat से जुड़े रहें।
आपका भरोसा ही हमारी ताकत है — हम आगे भी आपको तेज़, सटीक और निष्पक्ष खबरें लगातार पहुंचाते रहेंगे।
अधिक खबरों के लिए पढ़ें -> eNews-bharat
#OperationSindoorHero #ShrawanSingh #BalPuraskar2025 #IndianArmy #RealHero #InspiringIndia





