नई दिल्ली | महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट, जिसे देशभर में मनरेगा या नरेगा के नाम से जाना जाता है, उसका नाम बदलने का फैसला केंद्र सरकार ने ले लिया है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस संबंध में एक बिल को मंजूरी दी गई। अब इस योजना का नया नाम पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना होगा। न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार ने नाम बदलने के साथ-साथ इस योजना के तहत मिलने वाले काम के दिनों की संख्या भी बढ़ाने का निर्णय लिया है।

मनरेगा के तहत काम के दिन बढ़कर होंगे 125
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, ग्रामीण रोजगार योजना के तहत अब साल में मिलने वाले गारंटीशुदा काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और गरीब परिवारों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी। मनरेगा के तहत मजदूरी की दरें राज्यों के हिसाब से तय की जाती हैं और इसका सीधा लाभ ग्रामीण मजदूरों को मिलता है।
2005 में लागू हुई थी मनरेगा योजना
मनरेगा को वर्ष 2005 में लागू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण भारत में परिवारों को आजीविका की गारंटी देना है। इसके तहत हर उस ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का मजदूरी वाला काम देने की गारंटी दी जाती है, जिसके वयस्क सदस्य बिना किसी विशेष कौशल के काम करने के लिए तैयार हों। यह योजना वर्षों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा मानी जाती रही है।
कांग्रेस ने फैसले पर उठाए सवाल
मनरेगा का नाम बदले जाने को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने MGNREGA का नाम बदलकर पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिस मनरेगा को मोदी सरकार पहले कांग्रेस की विफलताओं का प्रतीक बताती थी, वही योजना आज ग्रामीण भारत के लिए संजीवनी साबित हुई है।
कांग्रेस का आरोप – योजनाओं के नाम बदलकर किया जा रहा है प्रचार
सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि मोदी सरकार को कांग्रेस की योजनाओं के नाम बदलकर उन्हें अपना बताने की पुरानी आदत है। उन्होंने दावा किया कि बीते 11 वर्षों में UPA सरकार की कई योजनाओं के नाम बदले गए हैं और उन पर नया ठप्पा लगाकर प्रचार किया गया है। उन्होंने उन योजनाओं की एक सूची भी साझा की, जिनके नाम बदले जाने का दावा कांग्रेस कर रही है।

विपक्ष ने बताया ध्यान भटकाने की कोशिश
मनरेगा का नाम बदलने को लेकर विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि ऐसे फैसले फ्रस्ट्रेशन की वजह से लिए जा रहे हैं और यह जनता का ध्यान भटकाने का एक तरीका है। उन्होंने कहा कि इतिहास को लेकर अब जनता समझ चुकी है कि असली सच्चाई क्या है और किस तरह से तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।
सरकार के फैसले पर सियासी घमासान जारी
मनरेगा का नाम बदलकर पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना किए जाने के फैसले के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। एक तरफ सरकार इसे ग्रामीण रोजगार और सम्मान से जोड़कर देख रही है, वहीं विपक्ष इसे केवल नाम बदलने की राजनीति बता रहा है। आने वाले दिनों में इस फैसले पर संसद और राजनीतिक मंचों पर और बहस होने की संभावना है।
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