आहोर (जसराज पुच्छल)
जालोर जिले के आहोर उपखंड क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, मालगढ़ में मंगलवार को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब ग्रामीणों और छात्रों ने एकजुट होकर स्कूल का मुख्य गेट बंद कर दिया।कारण — विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
सप्ताह भर पहले दिया था ज्ञापन, विभाग ने नहीं ली सुध
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने करीब एक सप्ताह पूर्व ही शिक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपकर चेताया था कि अगर जल्द ही विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो वे तालाबंदी के लिए मजबूर होंगे।लेकिन विभाग की ओर से न कोई जवाब आया और न ही कोई नया शिक्षक तैनात किया गया।नतीजतन, मंगलवार सुबह ग्रामीणों ने बच्चों के साथ मिलकर विद्यालय का मुख्य गेट बंद कर दिया और धरने पर बैठ गए।
विद्यालय में केवल कुछ शिक्षक, कई विषय बिना शिक्षक के
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में विज्ञान और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक महीनों से अनुपस्थित हैं।कुछ विषयों की क्लासेज़ बंद हैं और छात्रों को मजबूरन बिना पढ़ाई के ही स्कूल आना पड़ता है।छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है, जिससे अभिभावकों में गहरी नाराज़गी है।एक ग्रामीण ने कहा,”हमारे बच्चे रोज स्कूल जाते हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने वाला कोई नहीं। ऐसे में पढ़ाई का क्या फायदा? हमने विभाग से कई बार आग्रह किया, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की।”
छात्रों ने भी रखा विरोध, ‘शिक्षक दो – भविष्य बचाओ’ के नारे लगे
धरने के दौरान छात्र भी सक्रिय रूप से शामिल हुए।बच्चों ने “शिक्षक दो – भविष्य बचाओ”, “पढ़ाई हमारा हक है” जैसे नारे लगाए।कई छात्राओं ने कहा कि वे परीक्षा की तैयारी नहीं कर पा रही हैं क्योंकि विषय विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं।
ग्रामीण बोले – जब तक शिक्षक नहीं, ताला नहीं खुलेगा
ग्रामीणों ने दो टूक कहा है कि जब तक विद्यालय में आवश्यक संख्या में शिक्षक तैनात नहीं किए जाते, तब तक स्कूल का ताला नहीं खोला जाएगा।गांव के बुजुर्गों और अभिभावकों ने यह भी कहा कि वे जिला मुख्यालय तक आंदोलन ले जाने को तैयार हैं यदि विभाग ने तत्काल कार्रवाई नहीं की।
शिक्षा विभाग के अधिकारी बने मौन दर्शक
सूत्रों के अनुसार, विभागीय अधिकारियों को स्थिति की जानकारी मिल चुकी है, लेकिन अब तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।ग्रामीणों का कहना है कि अगर यही लापरवाही जारी रही तो आने वाले दिनों में पूरे क्षेत्र में बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
ग्रामीणों की मांग – पारदर्शी भर्ती और स्थायी शिक्षक नियुक्ति
धरने पर बैठे लोगों ने मांग की है कि
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विद्यालय में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति की जाए,
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अस्थायी शिक्षकों की बजाय स्थायी पदों पर भर्ती हो,
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शिक्षकों की अनुपस्थिति पर सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी समय में तो सभी शिक्षा की बातें करते हैं, लेकिन अब किसी को फुर्सत नहीं है कि बच्चों की हालत देख सके।मालगढ़ का यह मामला केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि यह राजस्थान की ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की हकीकत उजागर करता है।शिक्षा का अधिकार कानून तो है, पर जब स्कूलों में शिक्षक ही नहीं, तो यह कानून किस काम का?ग्रामीणों का यह आंदोलन शिक्षा विभाग के लिए एक चेतावनी है कि अगर अब भी सुधार नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
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