कोटा, संवाददाता: तेजपाल सिंग बग्गा
कोटा शहर में Kota Canal Drowning Incidents ने एक बार फिर प्रशासन और आमजन दोनों को झकझोर कर रख दिया है। नहरें, जो कभी जीवनदायिनी मानी जाती थीं, अब लगातार लाशें उगलती नजर आ रही हैं। बीते 24 घंटों में तीन लोगों की डूबने से मौत ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी है।
24 घंटे में 3 शव मिलने से हड़कंप
महज 24 घंटे के भीतर नहरों से तीन शव मिलने की खबर ने कोटा को दहला दिया है। Kota Canal Drowning Incidents के इन ताजा मामलों ने यह साबित कर दिया है कि नहरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है।
पाटन रोड, थर्मल और आसपास के क्षेत्र
पुलिस और प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार पाटन रोड, थर्मल क्षेत्र और आसपास के इलाकों की नहरों से शव बरामद किए गए हैं। Kota Canal Drowning Incidents इन इलाकों में लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल है।
नगर निगम गोताखोरों का रेस्क्यू ऑपरेशन
नगर निगम की गोताखोर टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर तीनों शवों को नहरों से बाहर निकाला। Kota Canal Drowning Incidents में गोताखोरों की भूमिका अहम रही, जिन्होंने जोखिम उठाकर शवों को बाहर निकाला।
एक शव की पहचान, दो अज्ञात
तीन शवों में से एक युवक की पहचान धर्मराज के रूप में हुई है। Kota Canal Drowning Incidents के इस मामले में धर्मराज का शव एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है, जबकि बाकी दो शवों की अब तक शिनाख्त नहीं हो पाई है।
सड़ी-गली हालत में मिले शव
दोनों अज्ञात शव सड़ी-गली अवस्था में मिले हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि वे कई दिनों से नहर में पड़े थे। Kota Canal Drowning Incidents की गंभीरता इन हालातों से और बढ़ जाती है।
हर साल नहरों में डूबने से 70–80 मौतें
आंकड़े बेहद डरावने हैं। केवल शहर की सीमाओं में ही हर साल करीब 70 से 80 लोग नहरों में डूबकर अकाल मौत का शिकार हो जाते हैं। Kota Canal Drowning Incidents को लेकर यह स्थिति वर्षों से बनी हुई है, लेकिन ठोस समाधान अब तक नहीं निकला।
ग्रामीण अंचलों में आंकड़ा 100 के पार
अगर शहर के साथ ग्रामीण इलाकों को भी जोड़ दिया जाए, तो नहरों में डूबने से मरने वालों की संख्या सालाना 100 के पार पहुंच जाती है। Kota Canal Drowning Incidents केवल शहरी समस्या नहीं, बल्कि पूरे जिले का संकट बन चुके हैं।
मौसम परिवर्तन के साथ बढ़ता खतरा
मौसम में बदलाव के साथ ही नहरों में डूबने की घटनाओं में इजाफा देखने को मिल रहा है। Kota Canal Drowning Incidents खासतौर पर सर्दी और बारिश के मौसम में बढ़ जाते हैं, जब पानी का बहाव तेज होता है।
नहरें क्यों बन रही हैं मौत का जाल
विशेषज्ञों का मानना है कि नहरों के किनारे सुरक्षा दीवारों का अभाव, चेतावनी बोर्डों की कमी और लाइटिंग न होना Kota Canal Drowning Incidents का मुख्य कारण है। कई जगहों पर खुले घाट और फिसलन भरे रास्ते जानलेवा साबित हो रहे हैं।
प्रशासन और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
लगातार हो रही मौतों के बावजूद नहरों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। Kota Canal Drowning Incidents ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समाधान और रोकथाम की जरूरत
विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि Kota Canal Drowning Incidents रोकने के लिए नहरों के किनारे मजबूत रेलिंग, सीसीटीवी, चेतावनी बोर्ड और नियमित पेट्रोलिंग जरूरी है। साथ ही लोगों में जागरूकता भी बढ़ानी होगी।
कोटा की नहरें अब सिर्फ पानी नहीं, बल्कि मौत भी बहा रही हैं। Kota Canal Drowning Incidents एक गंभीर चेतावनी हैं कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ये आंकड़े और भयावह हो सकते हैं। प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाज को मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना होगा।
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