झालावाड़, संवाददाता: कमलेश पंकज
खानपुर चेक बाउंस मामला झालावाड़ जिले के खानपुर कस्बे में लंबे समय से चल रहे एक आर्थिक विवाद से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने दोषी को कड़ा संदेश दिया है। इस मामले में सिविल कोर्ट परिसर में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को दोषी मानते हुए जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला न केवल पीड़ित पक्ष के लिए न्याय का प्रतीक बना, बल्कि समाज के लिए भी यह संदेश है कि आर्थिक लेनदेन में लापरवाही और धोखाधड़ी को कानून बर्दाश्त नहीं करता।
कोर्ट परिसर में सुनाया गया फैसला
खानपुर चेक बाउंस मामला खानपुर कस्बे के कोर्ट परिसर में न्यायिक मजिस्ट्रेट अंजू कुमारी की अदालत में सुनवाई के बाद निपटाया गया। अदालत ने आरोपी रामस्वरूप को चेक बाउंस का दोषी ठहराते हुए 6 महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी पर आर्थिक दंड भी लगाया, जिससे पीड़ित को हुए नुकसान की भरपाई हो सके।
कब और क्यों लिया गया था कर्ज
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता दीपक कुमार शर्मा के अनुसार, आरोपी रामस्वरूप ने 23 मई 2011 को मधुसूदन गौतम से ₹3,86,142 की राशि उधार ली थी। यह राशि आरोपी ने अपनी जमीन को रहन मुक्त कराने के उद्देश्य से मांगी थी। पीड़ित मधुसूदन गौतम ने आरोपी पर विश्वास करते हुए यह रकम उधार दी थी, लेकिन बाद में यही विश्वास खानपुर चेक बाउंस मामला बनने का कारण बन गया।
चेक बाउंस होने की पूरी कहानी
आरोपी ने उधार ली गई रकम लौटाने के लिए पीड़ित को चेक दिया, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद पीड़ित ने कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। खानपुर चेक बाउंस मामला धीरे-धीरे कानूनी सुनवाई के चरणों से गुजरता हुआ अंतिम फैसले तक पहुंचा, जहां कोर्ट ने सबूतों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।
पीड़ित पक्ष की दलीलें
पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता दीपक कुमार शर्मा ने अदालत में मजबूत पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि आरोपी ने जानबूझकर बिना पर्याप्त बैलेंस के चेक जारी किया, जिससे पीड़ित को आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ा। अदालत ने दलीलों और दस्तावेजी साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए खानपुर चेक बाउंस मामला में आरोपी को दोषी माना।
न्यायिक मजिस्ट्रेट का अहम आदेश
न्यायिक मजिस्ट्रेट अंजू कुमारी ने अपने फैसले में आरोपी को 6 महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा कोर्ट ने आरोपी को पीड़ित को ₹4,50,000 प्रतिकार राशि के रूप में अदा करने का आदेश दिया। यह फैसला खानपुर चेक बाउंस मामला में एक सख्त लेकिन न्यायसंगत निर्णय माना जा रहा है।
प्रतिकार राशि नहीं देने पर अतिरिक्त सजा
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी तय समय सीमा में प्रतिकार राशि अदा नहीं करता है, तो उसे 2 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ित को वास्तविक रूप से न्याय मिले और दोषी आर्थिक जिम्मेदारी से बच न सके।
चेक बाउंस कानून क्या कहता है
भारत में चेक बाउंस के मामलों पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत कार्रवाई की जाती है। इस कानून के अनुसार दोषी को जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
कानून का स्पष्ट संदेश
कुल मिलाकर, खानपुर चेक बाउंस मामला यह स्पष्ट करता है कि आर्थिक लेनदेन में ईमानदारी और जिम्मेदारी बेहद जरूरी है। कोर्ट का यह फैसला ऐसे मामलों में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। यह निर्णय न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि चेक बाउंस जैसे मामलों में कानून सख्ती से कार्रवाई करता है।
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