जम्मू-कश्मीर में हुए राज्यसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के तीन और बीजेपी के एक उम्मीदवार विजयी हुए। लेकिन बीजेपी को मिले चार अतिरिक्त वोटों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी। उमर अब्दुल्ला ने इस पर एक्स (Twitter) पर सवाल उठाते हुए संभावित क्रॉस वोटिंग की जांच की मांग की।
उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?
उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर लिखा, “@JKNC_ के सभी वोट चारों चुनावों में बरकरार रहे, जैसा कि हमारे चुनाव एजेंट ने हर मतदान पर्ची देखी। हमारे किसी भी विधायक ने क्रॉस वोटिंग नहीं की, तो फिर बीजेपी को चार अतिरिक्त वोट कहां से मिले?” उन्होंने यह भी पूछा कि क्या कोई विधायक जानबूझकर अपने वोट अमान्य कर गया और क्या उनमें इतनी हिम्मत है कि भाजपा की मदद करने की बात स्वीकार करें।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विजयी प्रत्याशी
नेशनल कॉन्फ्रेंस के तीन प्रत्याशियों — चौधरी मोहम्मद रमजान, सज्जाद अहमद किचलू और गुरविंदर सिंह ओबेरॉय — ने राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल की। चौधरी मोहम्मद रमजान चार बार विधायक रह चुके हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं।
सज्जाद अहमद किचलू का राजनीतिक सफर
60 वर्षीय सज्जाद अहमद किचलू किश्तवाड़ जिले के एक राजनीतिक परिवार से हैं। उनके पिता बशीर अहमद किचलू फारूक अब्दुल्ला सरकार में मंत्री थे। सज्जाद 2002 और 2008 में विधानसभा चुनाव जीते और 2015 में विधानपरिषद सदस्य बने।
गुरविंदर सिंह ओबेरॉय: जम्मू-कश्मीर के पहले सिख सांसद
नेशनल कॉन्फ्रेंस के कोषाध्यक्ष गुरविंदर सिंह ओबेरॉय (शम्मी ओबेरॉय) जम्मू-कश्मीर के पहले सिख सांसद बने। उन्होंने पीडीपी और कांग्रेस का समर्थन हासिल कर पार्टी को राज्यसभा सीट जिताने में अहम भूमिका निभाई।
बीजेपी के सत शर्मा की जीत
चौथी सीट बीजेपी के सत शर्मा के खाते में गई। 64 वर्षीय सत शर्मा पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और जम्मू-कश्मीर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। वह 2014 में जम्मू पश्चिम से विधायक चुने गए थे और पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार में मंत्री भी रहे थे।
विवाद की वजह
बीजेपी के पास 28 विधायक हैं, लेकिन सत शर्मा को 32 वोट मिले। यही चार अतिरिक्त वोट अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए हैं। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह लोकतंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है और जांच जरूरी है।
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