राजस्थान के एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले दृष्टिबाधित एथलीट हेमंत कुमार मीना ने एशियन पैरा गेम्स में 1500 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। हेमंत कुमार की यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और हौसले की कहानी है।
दुबई में 1500 मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन
दुबई में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में हेमंत कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के मजबूत खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए 1500 मीटर दौड़ में कांस्य पदक अपने नाम किया। यह मुकाबला बेहद कठिन था, लेकिन हेमंत ने अपने आत्मविश्वास और अनुशासन से यह उपलब्धि हासिल की।
आर्थिक तंगी और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद नहीं छोड़ा लक्ष्य
हेमंत कुमार का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। वे एक किसान परिवार में जन्मे हैं, जहां माता-पिता खेतों में मेहनत कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनके परिवार में एक और भाई भी दृष्टिबाधित है। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद हेमंत कुमार ने कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया।
उन्होंने खेल को अपना सहारा बनाया और लगातार मेहनत करते रहे। कठिन हालातों में भी उनका फोकस सिर्फ एक ही लक्ष्य पर रहा—देश के लिए पदक जीतना।

पदक जीतने के बाद भावुक हुए हेमंत कुमार
कांस्य पदक जीतने के बाद हेमंत कुमार भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि इस सफलता का पूरा श्रेय उनके परिवार, कोच और गुरुजनों को जाता है, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। हेमंत कुमार ने कहा,
“अगर मेरे परिवार और कोच का साथ नहीं होता, तो यह मुकाम हासिल करना संभव नहीं था।”
कोच महावीर सैनी बोले – राष्ट्रीय स्तर पर भी जीते हैं कई पदक
राजस्थान के कोच महावीर सैनी ने हेमंत कुमार की उपलब्धि पर गर्व जताया। उन्होंने बताया कि हेमंत कुमार ने इससे पहले राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह उनका पहला पदक है। कोच महावीर सैनी ने कहा कि हेमंत की मेहनत, अनुशासन और लगन इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में वे भारत के लिए और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगे।
राजस्थान नेत्रहीन विद्यालय से शुरू हुआ प्रशिक्षण
हेमंत कुमार की शुरुआती शिक्षा और खेल प्रशिक्षण जयपुर स्थित राजस्थान नेत्रहीन विद्यालय में हुआ। विद्यालय के प्रधानाचार्य धर्मराज गुर्जर ने बताया कि हेमंत ने कोच महेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण की शुरुआत की थी। प्रधानाचार्य ने कहा कि शुरू से ही हेमंत कुमार में सीखने की ललक और आगे बढ़ने का जज्बा दिखाई देता था, जो समय के साथ और मजबूत होता गया।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने हेमंत कुमार
हेमंत कुमार की यह जीत सिर्फ एक एथलीट की सफलता नहीं है, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन हालातों से जूझ रहे हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। उनकी कहानी बताती है कि सीमाएं शरीर की नहीं, बल्कि सोच की होती हैं।
देश और राजस्थान को गर्व
एशियन पैरा गेम्स में हेमंत कुमार का कांस्य पदक पैरा स्पोर्ट्स में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता है। राजस्थान सहित पूरे देश में उनकी इस उपलब्धि पर खुशी और गर्व का माहौल है। हेमंत कुमार ने अपने संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास से यह साबित कर दिया कि असली जीत हालातों से लड़ने में है। उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
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