बूंदी, संवाददाता:रवि शर्मा
बूंदी में बुधवार को गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह बालचंद पाड़ा गुरुद्वारे से निकली प्रभात फेरी ने पूरे शहर में भक्ति और सेवा की मिसाल पेश की। गुरु वाणी के मधुर कीर्तन से वातावरण गूंज उठा और संगत ने जगह-जगह फूलों की वर्षा कर फेरी का स्वागत किया।
प्रभात फेरी में झलका सेवा भाव
प्रभात फेरी का शुभारंभ बालचंद पाड़ा गुरुद्वारे से हुआ और यह सूरज जी का बढ़, रावला चौक, नाहर का चौहाटा, तिलक चौक, सदर बाजार, चोमूखा बाजार, चौगान दरवाजा और सब्जी मंडी रोड होते हुए गुरु नानक कॉलोनी स्थितगुरुद्वारा तक पहुंची। इस दौरान नगर की गलियां “वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह” के जयकारों से गूंज उठीं।फेरी के दौरान महिलाओं ने पालकी के आगे सड़क पर झाड़ू लगाकर सेवा की, जो गुरु परंपरा में निहित विनम्रता और समर्पण का प्रतीक है। बच्चों और युवाओं ने भी संगत में बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे आयोजन एक जनआंदोलन की तरह बन गया।
दीवान और लंगर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
दोपहर को बायपास रोड स्थित गुरुद्वारा श्री लंगर साहिब में खुले पंडाल में दीवान सजाया गया। यहां श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में माथा टेका और अरदास की। पंजाब से आए प्रसिद्ध रागी जत्थे ने गुरु वाणी का मधुर कीर्तन प्रस्तुत किया, जिससे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।दीवान के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद स्वरूप लंगर ग्रहण किया। लंगर सेवा में महिलाओं और युवाओं ने मिलकर योगदान दिया। हर आयु वर्ग के लोगों ने इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया।
शहर के गणमान्य लोग रहे मौजूद
गुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव पर आयोजित इस कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। गुरुद्वारा लंगर साहिब के प्रधान सुखजिंदर सिंह के साथ विधायक हरिमोहन शर्मा, भाजपा जिला अध्यक्ष रामेश्वर मीणा, शहर अध्यक्ष राजकुमार श्रंगी, जिला महामंत्री संजय लाठी, पूर्व पार्षद संजय भूटानी और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष नीरज पुरोहित सहित बड़ी संख्या में सिख समाज के महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हुए।सभी ने संगत में बैठकर गुरु वाणी का श्रवण किया और सामूहिक रूप से मानवता, समानता और सेवा के संदेश को आत्मसात किया।
गुरु नानक देव जी के उपदेश आज भी प्रासंगिक
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने गुरु नानक देव जी के संदेशों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गुरु नानक देव जी ने “नाम जपो, कीरत करो, वंड छको” के सिद्धांतों के माध्यम से समाज को प्रेम, करुणा और समानता की राह दिखाई थी। आज भी उनके उपदेश इंसानियत के मार्गदर्शन के लिए सबसे प्रासंगिक हैं।बूंदी में गुरु नानक जयंती का आयोजन न केवल धार्मिक उत्सव था, बल्कि यह समाज में एकता, प्रेम और सेवा की भावना को मजबूत करने वाला आयोजन बन गया। प्रभात फेरी से लेकर दीवान और लंगर तक हर क्षण में “सेवा परमो धर्म” की झलक दिखाई दी।गुरु नानक देव जी के उपदेशों के अनुरूप, बूंदी ने आज यह संदेश दिया कि जब तक सेवा, समर्पण और समानता हमारे जीवन का हिस्सा हैं, तब तक मानवता जीवित है।
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