टोंक, संवाददाता: कमलेश प्रजापत
मालपुरा (टोंक) क्षेत्र में बीसलपुर परियोजना की दूदू पेयजल पाइपलाइन लंबे समय से लीकेज की समस्या से जूझ रही है। टोरडी सागर बांध से हाईवे पर देवनारायण मंदिर के सामने से गुजरने वाली इस पाइपलाइन में रिसाव इतना बढ़ चुका है कि खेतों में पानी भरने की स्थिति बन चुकी है। “Bisalpur Pipeline Leakage” अब स्थानीय किसानों के लिए भारी संकट बन गया है और संबंधित विभाग इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।
किसान की गेहूं फसल डूबने का पूरा मामला
किसान पोटूराम कहार के खेत में पाइपलाइन से लगातार बह रहे पानी ने भारी तबाही मचा दी है। उन्होंने बताया कि हाईवे किनारे पाइपलाइन फटने से पानी सीधे खेतों में भरता रहता है। कुछ ही दिनों में खड़ी गेहूं की फसल लबालब पानी में डूब गई और नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। किसान का कहना है कि फसल बचाने के लिए वह अपने स्तर पर पानी निकालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन लगातार रिसाव के चलते यह प्रयास नाकाम साबित हो रहे हैं।
विभाग और ठेकेदार की लापरवाही उजागर
किसान पोटूराम ने कई बार बीसलपुर पेयजल परियोजना के ठेकेदार और संबंधित विभाग को शिकायतें भेजीं। इसके बावजूद न तो पाइपलाइन की मरम्मत हुई और न ही रिसाव को रोकने के लिए किसी तरह की त्वरित कार्रवाई की गई। “Bisalpur Pipeline Leakage” मामले ने अब विभागीय लापरवाही को पूरी तरह उजागर कर दिया है। किसान का आरोप है कि अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे देते हैं, लेकिन ज़मीन पर कोई सुधार नहीं होता।
दो साल से लगातार नुकसान झेल रहा किसान
पोटूराम कहार ने बताया कि पिछले दो वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है। हर सीजन में पाइपलाइन लीकेज के कारण उनकी फसलें खराब होती हैं, जिससे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। साल-दर-साल घटती आय और खराब फसल के कारण किसान परिवार पर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। इस मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि Bisalpur Pipeline Leakage केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
किसान की प्रशासन से गुहार
किसान ने टोंक जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पाइपलाइन की तुरंत मरम्मत की जाए और स्थायी समाधान निकाला जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह हर बार शिकायत के बाद भी कोई सुधार नहीं होता, उससे किसानों का विश्वास प्रशासन से उठता जा रहा है। “Bisalpur Pipeline Leakage” को यदि जल्द नहीं रोका गया तो आसपास के अन्य खेत भी प्रभावित हो सकते हैं।
समाधान क्या हो सकता है?
स्थानीय लोग पाइपलाइन को पूरी तरह बदलने या उच्च गुणवत्ता की मरम्मत करने की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार लीकेज का अर्थ है—या तो पाइपलाइन पुरानी हो चुकी है या इंस्टॉलेशन में तकनीकी त्रुटियाँ हैं। प्रशासन चाहे तो इस पाइपलाइन का संपूर्ण निरीक्षण करवाकर स्थायी समाधान निकाल सकता है, ताकि किसानों को भविष्य में नुकसान न झेलना पड़े।
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