नई दिल्ली | भारत-ओमान CEPA समझौता दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक आर्थिक करार है, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश और सेवाओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है। इस समझौते के तहत भारत का लगभग 98% सामान ओमान में टैक्स फ्री हो जाएगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा मिलेगा।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिकी टैरिफ और यूरोपीय यूनियन के कार्बन टैक्स जैसी चुनौतियां भारत के सामने हैं। ऐसे में भारत-ओमान CEPA समझौता भारत के लिए नए बाजार खोलने का मजबूत जरिया बनकर उभरा है।

भारत-ओमान व्यापार के आंकड़े और वैश्विक संदर्भ
वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 10.613 अरब डॉलर यानी करीब 95,700 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। भारत-ओमान CEPA समझौता इस व्यापार को और विस्तार देगा, जिससे भारत की वैश्विक ट्रेड रणनीति को मजबूती मिलेगी और मिडिल ईस्ट में भारत की मौजूदगी और प्रभाव बढ़ेगा।

भारत का 98% सामान ओमान में टैक्स फ्री कैसे
भारत-ओमान CEPA समझौते के तहत ओमान ने अपनी 98.08% टैरिफ लाइन्स पर भारत को जीरो ड्यूटी एक्सेस दिया है। इसका मतलब है कि भारत के लगभग सभी प्रमुख उत्पाद अब ओमान में बिना टैक्स के निर्यात किए जा सकेंगे। यह 98.08% टैरिफ लाइन्स भारत के 99.38% निर्यात मूल्य को कवर करती हैं, यानी संख्या के साथ-साथ मूल्य के लिहाज से भी भारत को बड़ा फायदा मिलेगा।
आम आदमी को CEPA समझौते से क्या फायदा
भारत-ओमान CEPA समझौता सिर्फ बड़े उद्योगपतियों के लिए नहीं, बल्कि आम आदमी के लिए भी कई फायदे लेकर आया है। इससे रोजगार बढ़ेगा, आय में इजाफा होगा और महंगाई पर अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रण रहेगा। ड्यूटी फ्री निर्यात के कारण भारतीय उत्पाद ओमान में सस्ते बिकेंगे, जिससे मांग बढ़ेगी और उत्पादन में तेजी आएगी।
नौकरियां और कमाई बढ़ने की संभावनाएं
कपड़ा, जूते, ज्वेलरी, कृषि और हस्तशिल्प जैसे सेक्टर्स में निर्यात बढ़ने से ग्रामीण कारीगरों, महिलाओं और छोटे उद्यमियों को नए रोजगार मिलेंगे। भारत-ओमान CEPA समझौता खासतौर पर MSME सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है, क्योंकि यही सेक्टर सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करता है।
प्रवासी भारतीयों के लिए वीजा और रोजगार अवसर
इस समझौते से ओमान में रहने और काम करने वाले भारतीय प्रवासियों को बड़ी राहत मिलेगी। डॉक्टर, इंजीनियर, आईटी प्रोफेशनल्स और अन्य कुशल कामगारों के लिए वीजा और स्टे की प्रक्रिया आसान होगी। इससे ज्यादा भारतीय ओमान में काम कर सकेंगे, रेमिटेंस बढ़ेगा और देश में परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
हेल्थ, आयुष और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा
भारत-ओमान CEPA समझौते से आयुष, योग और पारंपरिक चिकित्सा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा मिलेगा। इससे भारतीय डॉक्टरों, हेल्थ स्टार्टअप्स और छोटे हेल्थ बिजनेस को नए अवसर मिलेंगे और मेडिकल टूरिज्म को भी गति मिलेगी।
MSME और छोटे कारोबारियों को कैसे मिलेगा बूस्ट
छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को ओमान के बाजार में ज्यादा पहुंच मिलेगी। सर्विस सेक्टर में 100% FDI की अनुमति से निवेश बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर नौकरियां पैदा होंगी। यह समझौता छोटे कारोबारियों को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
कौन-से सेक्टर्स होंगे सबसे ज्यादा फायदे में
भारत-ओमान CEPA समझौते से टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, फार्मा, मेडिकल डिवाइसेज और ऑटोमोबाइल सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होगा। इन सेक्टर्स में भारत की पहले से मजबूत पकड़ है, जिसे यह डील और मजबूत बनाएगी।
किन प्रोडक्ट्स को डील से बाहर रखा गया
भारत ने अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था और किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डेयरी, चॉकलेट्स, गोल्ड, सिल्वर, ज्वेलरी और फुटवियर जैसे संवेदनशील उत्पादों को इस डील से बाहर रखा है। इससे घरेलू MSME और किसानों को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा।
सर्विस सेक्टर और 100% FDI का बड़ा मौका
ओमान ने पहली बार 127 सर्विस सब-सेक्टर्स में भारत को एक्सेस देने का वादा किया है, जिसमें कंप्यूटर सर्विसेज, बिजनेस सर्विसेज, एजुकेशन, हेल्थ और रिसर्च एंड डेवलपमेंट शामिल हैं। प्रमुख सर्विस सेक्टर्स में 100% FDI की अनुमति से भारतीय कंपनियों को बड़ा विस्तार मिलेगा।
कॉमर्स मिनिस्टर और एक्सपर्ट्स की राय
कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने भारत-ओमान CEPA समझौते को दोनों देशों की सदियों पुरानी दोस्ती का ‘वॉटरशेड मोमेंट’ बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय एक्सपोर्टर्स और प्रोफेशनल्स के लिए नए अवसर खोलेगा। GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव के अनुसार, टैरिफ खत्म होने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और 6000 से ज्यादा जॉइंट वेंचर्स के जरिए भारत की मिडिल ईस्ट में रणनीतिक मौजूदगी मजबूत होगी।
भारत की ग्लोबल ट्रेड रणनीति में CEPA की भूमिका
भारत-ओमान CEPA समझौता भारत की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह नए और भरोसेमंद व्यापारिक साझेदारों के साथ रिश्ते मजबूत कर रहा है। यह समझौता न केवल आर्थिक, बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टि से भी भारत की स्थिति को मजबूत करता है।
भारत की आर्थिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी और खबरें आप यहां पढ़ सकते हैं:
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CEPA और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों की सामान्य जानकारी के लिए यह विश्वसनीय स्रोत देखें:
https://en.wikipedia.org/wiki/Comprehensive_Economic_Partnership_Agreement
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