कर्नाटक के बेलगावी जिले के अमन नगर क्षेत्र में सोमवार रात एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां कोयले के चूल्हे से फैली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के जहरीले धुएं ने तीन युवकों की जान ले ली। यह घटना तब सामने आई जब अगले दिन शाम तक कमरे का दरवाजा न खुलने पर पड़ोसियों ने शक होने पर दरवाजा तोड़ा। अंदर का दृश्य दिल दहला देने वाला था, क्योंकि चारों युवक बेहोशी की हालत में मिले, जिनमें से तीन की मौके पर ही मौत हो चुकी थी जबकि एक युवक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मृतकों की पहचान और युवकों की हालत
पुलिस के अनुसार, जिन तीन युवकों की मौत हुई है, उनकी पहचान रिहान मट्टे (22), सरफराज हरप्पनहल्ली (22) और मोइन नलबंद (23) के रूप में हुई है। चौथा युवक शहनवाज़ जीवित बच गया है, लेकिन उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। उसे तुरंत एक निजी अस्पताल के आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहाँ डॉक्टर उसकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
हादसा कैसे हुआ? जानें पूरी वजह
चारों युवक सोमवार देर रात एक शादी समारोह में शामिल होकर वापस आए थे। ठंड का मौसम होने के कारण उन्होंने खुद को गर्म रखने के लिए कमरे में कोयले का चूल्हा जलाकर सोने का फैसला किया। दुखद बात यह थी कि कमरे में लगभग कोई वेंटिलेशन नहीं था। जैसे-जैसे रात बढ़ती गई, चूल्हे से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस पूरे कमरे में फैलती चली गई, जिसकी वजह से युवकों को धीरे-धीरे सांस लेने में दिक्कत होने लगी और वे बेहोशी की हालत में चले गए।
कार्बन मोनोऑक्साइड गैस: अदृश्य और जानलेवा
कार्बन मोनोऑक्साइड एक बेहद खतरनाक गैस है जो न रंग में दिखाई देती है, न गंध के माध्यम से महसूस होती है। यह रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन के साथ जुड़कर ऑक्सीजन को शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक पहुँचने से रोक देती है। ऐसे में व्यक्ति को ऑक्सीजन की कमी होने लगती है और धीरे-धीरे बेहोशी और फिर मृत्यु तक की स्थिति बन जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बंद कमरों में कोयला, लकड़ी या किसी भी प्रकार के पारंपरिक चूल्हे का इस्तेमाल बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
पड़ोसियों को कैसे हुआ शक?
घटना के बारे में पड़ोसियों ने बताया कि सामान्य दिनों की तरह चारों युवक सुबह घर से बाहर नहीं निकले। कई बार कॉल करने पर भी फोन न उठने से लोगों को शक हुआ। जब शाम तक कोई हरकत नहीं दिखी, तो पड़ोसियों ने दरवाजा तोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने देखा कि कमरा धुएं से भरा हुआ था और चारों युवक बेहोशी की हालत में पड़े थे। तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को बुलाया गया।
पुलिस की जांच और अपील
बेलगावी पुलिस ने बताया कि कमरे के भीतर कोई खिड़की या उचित वेंटिलेशन नहीं था, जिससे गैस बाहर नहीं निकल सकी। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है और आगे मामले की जांच जारी है। पुलिस अधिकारी और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से अपील कर रहे हैं कि बंद कमरों में किसी भी प्रकार का कोयले का हीटर, अंगीठी या चूल्हा न जलाएं, क्योंकि यह जीवन के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
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