कोलकाता | पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा इलाके में मंगलवार देर रात बाबरी मस्जिद के शिलान्यास से जुड़े पोस्टर लगाए गए, जिनमें 6 दिसंबर को मस्जिद की नींव रखने का समारोह घोषित किया गया है। इन पोस्टरों पर कार्यक्रम के आयोजक के रूप में तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक हुमायूं कबीर का नाम छपा हुआ है। जल टंकी और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए ये पोस्टर तेजी से चर्चा का विषय बन गए हैं।

TMC विधायक बोले—6 दिसंबर को रखेंगे नींव, तीन साल में निर्माण पूरा
TMC विधायक हुमायूं कबीर ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए पुष्टि की कि 6 दिसंबर को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखी जाएगी। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद का पूरा निर्माण तीन साल में कर दिया जाएगा और इस कार्यक्रम में कई मुस्लिम नेता भी शामिल होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि 6 दिसंबर को बाबरी विध्वंस की बरसी होती है और इसी अवसर पर यह शिलान्यास रखा जा रहा है।
अयोध्या में उसी दिन पूर्ण हुआ राम मंदिर—PM मोदी ने किया ध्वजारोहण
यह बयान ऐसे समय में आया है जब इसी दिन अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया। 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी और तब से मंदिर लगभग पूर्ण रूप से तैयार हो चुका है। इस तरह दोनों घटनाओं का एक ही तारीख पर होना राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।
BJP ने TMC पर लगाया बड़ा आरोप—“मस्जिद नहीं, बांग्लादेश की नींव रख रही TMC”
भाजपा नेताओं ने बाबरी मस्जिद शिलान्यास के इस पोस्टर को लेकर TMC पर तीखा हमला किया है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने दावा किया कि TMC “मस्जिद नहीं, बांग्लादेश की आधारशिला” रख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के समर्थन पर चल रही है। भाजपा नेताओं ने इसे सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाला कदम बताया है।

कांग्रेस में मिश्रित प्रतिक्रिया—कुछ नेताओं ने समर्थन किया, कुछ ने विरोध
कांग्रेस नेता उदित राज ने TMC विधायक के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि अगर मंदिर का शिलान्यास किया जा सकता है, तो मस्जिद का क्यों नहीं? वहीं महाराष्ट्र कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि मस्जिद बनाना ठीक है, पर विशेष रूप से बाबरी मस्जिद ही क्यों? उन्होंने इसे राजनीतिक उद्देश्य से पुराना विवाद फिर से उठाने का आरोप बताया।
बाबरी विध्वंस से लेकर राम मंदिर निर्माण तक—संक्षिप्त इतिहास
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचे को कार सेवकों ने ढहा दिया था। इसके बाद 2003 में ASI ने रिपोर्ट में वहाँ मंदिरनुमा संरचना होने का दावा किया। 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया। 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 2.77 एकड़ भूमि रामलला की जन्मभूमि घोषित की और मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का आदेश दिया। 2020 में राम मंदिर भूमि पूजन और 2024 में प्राण-प्रतिष्ठा पूरी हुई।
6 साल बाद भी प्रस्तावित मस्जिद का निर्माण शुरू नहीं
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या से 25 किमी दूर धन्नीपुर गांव में 5 एकड़ जमीन मस्जिद निर्माण के लिए दी गई थी, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) के मुताबिक मस्जिद और सामुदायिक सुविधाओं का निर्माण प्रस्तावित था, लेकिन अयोध्या विकास प्राधिकरण ने अभी तक लेआउट प्लान को मंजूरी नहीं दी है।






