टोंक, संवाददाता: सुरेश भदाला
भाकृअनुप- केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI) अविकानगर में दिनांक 30 दिसंबर 2025 को स्वच्छता पखवाड़ा 2025 के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशालाओं में उपयोग होने वाले रसायनों के सुरक्षित निस्तारण तथा सिंगल प्लास्टिक यूज को लेकर जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यशाला का आयोजन संस्थान की प्रयोगशालाओं में होने वाले रासायनिक अपशिष्टों के पर्यावरणीय प्रभाव को ध्यान में रखते हुए किया गया, ताकि इनके अनुचित निस्तारण से पर्यावरण और जीव-जंतुओं को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रणधीर सिंह भट्ट ने की
इस कार्यशाला की अध्यक्षता डॉ. रणधीर सिंह भट्ट द्वारा की गई। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रयोगशालाओं में उपयोग किए जाने वाले रसायनों का सही स्थान पर और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार निस्तारण अत्यंत आवश्यक है। यदि रसायनों का निस्तारण लापरवाही से किया जाए तो इससे पर्यावरण, भूमि, जल स्रोतों और जीव-जंतुओं पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने सभी वैज्ञानिकों और कर्मचारियों से अपील की कि वे Avikanagar Workshop सुरक्षा नियमों का पूर्ण पालन करें और रसायनों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें।
विशेषज्ञों ने दी रसायन निस्तारण की विस्तृत जानकारी
कार्यशाला के दौरान प्रयोगशाला में उपयोग होने वाले विभिन्न प्रकार के रसायनों के निस्तारण की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर डॉ. जी. गणेश सोनवाने, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. अजित सिंह महला एवं डॉ. विनोद कदम ने अपने-अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रयोगशाला में उपयोग के बाद रसायनों को उनके गुणों के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर निस्तारित किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी बताया गया कि कौन से रसायन पुनः उपयोग योग्य होते हैं और किनका सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जाना आवश्यक है।
सिंगल प्लास्टिक यूज पर रोक को लेकर जागरूकता
कार्यशाला में सिंगल प्लास्टिक यूज से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर भी विशेष चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि प्लास्टिक कचरे का अनुचित निस्तारण लंबे समय तक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है और यह जीव-जंतुओं के लिए भी घातक साबित होता है। संस्थान में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को न्यूनतम करने और इसके विकल्प अपनाने पर जोर दिया गया।
नोडल अधिकारी ने बताए सुरक्षा उपाय
स्वच्छता अभियान के नोडल अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि संस्थान की प्रयोगशालाओं में रसायनों के निस्तारण के लिए निर्धारित स्थानों को फेंसिंग कर सुरक्षित किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रसायन खुले में न रहें और उनका संपर्क किसी भी जीव-जंतु या आम व्यक्ति से न हो। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत संस्थान परिसर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी की जाएगी।
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