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बूंदी बैरवा अगवानी विवाद: डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा की स्वागत में जिला परिवहन अधिकारी की अनुपस्थिति ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा

बूंदी, संवाददाता: हेमराज सैनी

 

बूंदी जिले में सोमवार को उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा का दौरा हुआ। डिप्टी सीएम सायं 4:13 बजे सर्किट हाउस पहुंचे। उनका आगमन जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में विशेष महत्व रखता था, क्योंकि बैरवा खुद परिवहन मंत्री भी हैं। इस दौरे में डिप्टी सीएम ने स्थानीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की और जिले के विकास, परिवहन और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा की।

 

जिला परिवहन अधिकारी की विलंबित उपस्थिति

डिप्टी सीएम बैरवा के स्वागत का सबसे बड़ा विवाद यह बना कि जिला परिवहन अधिकारी (DTO) सौम्या) तय समय पर उपस्थित नहीं हुईं। DTO 4:28 बजे पहुँची, जबकि डिप्टी सीएम पहले ही सर्किट हाउस में मौजूद थे। यह विलंब विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि डिप्टी सीएम बैरवा परिवहन विभाग के मंत्री भी हैं, और उनका स्वागत विभाग प्रमुख की उपस्थिति में होना अनिवार्य है। इस घटना ने प्रोटोकॉल उल्लंघन और प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल उठाए।

 

प्रोटोकॉल उल्लंघन और प्रशासनिक महत्व

प्रोटोकॉल के अनुसार, उच्च पदस्थ अधिकारी और मंत्री के दौरे पर संबंधित विभाग का प्रमुख समय पर उपस्थित रहना अनिवार्य है। DTO की देर से उपस्थिति ने प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी और सतर्कता की कमी को उजागर किया। डिप्टी सीएम बैरवा का दौरा केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह जिले के परिवहन और प्रशासनिक मुद्दों पर निरीक्षण का भी अवसर था। प्रोटोकॉल का पालन न होने से प्रशासनिक प्रभाव और सार्वजनिक विश्वास दोनों पर असर पड़ सकता है।

 

राजनीतिक हलकों में चर्चा

DTO की विलंबित उपस्थिति और अगवानी में शामिल न होने की खबर ने स्थानीय भाजपा और राजनीतिक दलों के बीच चर्चा छेड़ दी। विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना राजनीतिक संवेदनशीलता और प्रशासनिक दक्षता दोनों पर असर डाल सकती है। मीडिया और सोशल मीडिया में भी इसे विवादित मुद्दा के रूप में रिपोर्ट किया गया। कुछ राजनीतिक जानकार इसे भविष्य की चुनावी रणनीति और प्रशासनिक साख से जोड़कर देख रहे हैं।

 

प्रशासन और अधिकारी की प्रतिक्रिया

सूचना मिलने के बाद प्रशासन ने कहा कि DTO की विलंबित उपस्थिति तकनीकी कारण या व्यक्तिगत कारण से हो सकती है। हालांकि राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे गंभीर प्रोटोकॉल उल्लंघन माना जा रहा है। स्थानीय अधिकारियों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सावधानी और निर्देश बढ़ाने का आश्वासन दिया। DTO के विलंबित आगमन ने यह स्पष्ट किया कि समय पालन और प्रशासनिक तैयारी कितनी महत्वपूर्ण है।

 

सामाजिक और राजनीतिक संदेश

बूंदी बैरवा अगवानी मामला प्रशासन और जनता दोनों के लिए एक सीखने योग्य अनुभव है। यह दिखाता है कि: प्रशासनिक प्रोटोकॉल का पालन न केवल शिष्टाचार है, बल्कि सामाजिक विश्वास और राजनीतिक संतुलन के लिए भी जरूरी है। अधिकारियों की समय पर उपस्थिति स्थानीय जनता और राजनीतिक वर्ग के विश्वास को बनाए रखती है। विलंब और अनुपस्थिति जैसी घटनाएँ सामाजिक और राजनीतिक चर्चाओं को जन्म देती हैं। भविष्य में प्रशासनिक सतर्कता बढ़ाना और protocol का पालन सुनिश्चित करना अत्यावश्यक है।

 

समयपालन और प्रशासनिक सतर्कता

इस घटना से स्पष्ट होता है कि: समय का पालन और protocol की गंभीरता प्रशासनिक कार्यकुशलता के लिए जरूरी है। उच्च पदस्थ अधिकारियों के दौरे पर समुचित स्वागत और तैयारी प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अधिकारियों को निर्देशित करना और सतर्क रहना आवश्यक है। राजनीतिक हलकों में चर्चा और मीडिया कवरेज से प्रशासनिक सुधार की महत्वपूर्ण आवश्यकता उजागर होती है। बूंदी बैरवा अगवानी मामला प्रशासनिक सतर्कता, समयपालन और राजनीतिक संवेदनशीलता के महत्व को पूरी तरह स्पष्ट करता है।

 

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मकराना गौचर भूमि अतिक्रमण मामला: ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा, आरोपी पर कानूनी कार्रवाई की मांग

मकराना, संवाददाता: लक्ष्मण सिंह मैढ़ 

 

मकराना के आसरवा गांव में लंबे समय से गौचर भूमि पर अवैध अतिक्रमण चल रहा है। गांव के निवासी और नाथ समाज के लोग इस अतिक्रमण से परेशान हैं। अतिक्रमण करने वाला बिरमाराम पुत्र स्व. बागाराम (जाति भोपा) ने न केवल गौचर भूमि में कब्जा किया, बल्कि आसपास रहने वाले नाथ समाज के परिवारों को मानसिक और शारीरिक रूप से भी परेशान किया।

 

ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा

ग्रामीणों ने रविवार को उपखंड अधिकारी अंशुल सिंह और विधायक मकराना को ज्ञापन देकर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और अतिक्रमण हटाने की मांग की। इस मौके पर पीड़ित पक्ष के लोग, जैसे फेफनान, नंदलाल, देवीलाल और मुकेश योगी, उपस्थित रहे। ज्ञापन में बताया गया कि अतिक्रमण से गांव में शांति भंग हो रही है और लोगों की सुरक्षा खतरे में है।

 

अवैध अतिक्रमण और उत्पीड़न की घटनाएँ

ग्रामीणों ने घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया: दिनांक 26 जनवरी को जशोदा पत्नी नंदलाल (जाति नाथ) के घर में घुसकर मारपीट और गाली-गलौच। गौचर में खेजड़ी वृक्षों की अवैध कटाई। 27 जनवरी को गांववालों द्वारा समझाने पर भोपा परिवार के पुरुषों और महिलाओं द्वारा पथराव और गाली-गलौच। ग्रामीणों का कहना है कि यह समान्य समस्या नहीं, बल्कि लगातार उत्पीड़न की स्थिति है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो सामाजिक अशांति बढ़ सकती है।

 

पुलिस और प्रशासन की भूमिका

सूचना के अनुसार, मकराना पुलिस मौके पर पहुँची और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि, भोपा परिवार के व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया। ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय प्रशासन की त्वरित कार्रवाई आवश्यक है ताकि भविष्य में हिंसा और अतिक्रमण की घटनाएँ न हों। उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देने का मुख्य उद्देश्य कानूनी और प्रशासनिक हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है।

 

ग्रामीणों की मांग और आगामी कदम

ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे चाहते हैं कि: अतिक्रमण तुरंत हटाया जाए। भोपा परिवार को अन्य सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन सतर्क रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सामूहिक रूप से और भी प्रभावी आंदोलन किया जाएगा।

 

सामाजिक एवं कानूनी दृष्टि

यह मामला केवल एक अतिक्रमण का मामला नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और सुरक्षा का मुद्दा है। गौचर भूमि जैसे सार्वजनिक संसाधनों का अवैध कब्जा न केवल ग्रामीणों के जीवन पर असर डालता है, बल्कि स्थानीय पर्यावरण और कृषि प्रणाली पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। कानूनी दृष्टि से, अतिक्रमण और मारपीट दोनों ही गंभीर अपराध हैं और इनके लिए कड़ी कार्रवाई आवश्यक है। स्थानीय प्रशासन की सुस्ती से सामाजिक तनाव और असुरक्षा बढ़ सकती है।

 

न्याय और सुरक्षा की आवश्यकता

मकराना गौचर भूमि अतिक्रमण मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि: ग्रामीणों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई जरूरी है। सार्वजनिक भूमि और गौचर की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।प्रशासन, पुलिस और विधायक को मिलकर अवैध अतिक्रमण रोकने और कानून का पालन सुनिश्चित करना होगा। समाज में ऐसे मामलों के प्रति सामाजिक जागरूकता और सक्रियता बढ़ाना आवश्यक है। इस मामले में स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और नागरिकों की जागरूकता ही न्याय सुनिश्चित कर सकती है।

 

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खाजूवाला दलित बालिका मामला: गोविन्द राम मेघवाल के नेतृत्व में प्रदर्शन, न्याय और 50 लाख सहायता की मांग

बीकानेर, संवाददाता: श्रीराम चौहान

 

खाजूवाला में दलित नाबालिग बालिका के साथ हुए रेप और उसकी मृत्यु के मामले को लेकर रविवार को उपखंड कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण और विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष और तेज कार्रवाई सुनिश्चित करना था। स्थानीय जनता, विभिन्न राजनीतिक दलों और समाजसेवी संगठनों ने इस अवसर पर एकजुट होकर पीड़ित परिवार के प्रति समर्थन दिखाया।

 

प्रदर्शन का नेतृत्व और स्थानीय सहभागिता

प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व कैबिनेट मंत्री गोविन्द राम मेघवाल ने किया। प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ता, स्थानीय निवासी और सामाजिक संगठनों के सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए। स्थानीय लोग अपनी नाराजगी और पीड़ित परिवार के लिए सहानुभूति व्यक्त करने के लिए एकत्रित हुए। इस तरह के शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि समाज अन्याय और हिंसा के खिलाफ सजग और जागरूक है।

 

ज्ञापन में रखी गई 6 सूत्रीय मांगें

प्रदर्शन के दौरान उपखंड अधिकारी और पुलिस अधिकारियों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कुल 6 सूत्रीय मांगें रखी गईं: मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित की जाए।, दोषियों के खिलाफ सख्त और प्रभावी कार्रवाई की जाए।, पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।, एससी/एसटी एक्ट के तहत मिलने वाली पूरी सहायता तुरंत उपलब्ध करवाई जाए।, परिवार के एक सदस्य को आवास और रोजगार प्रदान किया जाए।, पीड़ित परिवार को मानसिक और सामाजिक समर्थन प्रदान किया जाए।, इन मांगों से यह स्पष्ट होता है कि प्रदर्शन का उद्देश्य केवल विरोध नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार की सुरक्षा और भविष्य को सुनिश्चित करना था।

 

घटना का पूरा विवरण और पीड़िता की मृत्यु

जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक घटना 24 जनवरी को हुई। पीड़िता के साथ रेप किया गया, जिसके बाद उसने जहरीला पदार्थ का सेवन कर लिया। इलाज के दौरान, 27 जनवरी को उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे खाजूवाला क्षेत्र में गहरी शोक और आक्रोश पैदा किया। स्थानीय लोग और समाजसेवी संगठनों ने इस घटना को समाज और प्रशासन के लिए चेतावनी बताया कि बच्चों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान देना आवश्यक है।

 

आरोपी की गिरफ्तारी और जांच की स्थिति

पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा। इस मामले की जांच डीवाईएसपी अमरजीत चावला कर रहे हैं। जांच प्रक्रिया में कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई है। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया कि सभी कानूनी और आर्थिक सहायता समय पर प्रदान की जाएगी।

 

पूर्व मंत्री गोविन्द राम मेघवाल का सशक्त बयान

पूर्व मंत्री गोविन्द राम मेघवाल ने कहा कि दलित बेटी को न्याय दिलाने की यह लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी। उन्होंने जोर दिया कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय और सुरक्षा दिलाकर ही यह लड़ाई समाप्त होगी। गोविन्द राम मेघवाल ने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

 

समाज और प्रशासन पर जनता की नजर

इस मामले में अब सभी की निगाहें प्रशासन और जांच पर टिकी हैं। स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन तेज, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई करे। प्रदर्शन और ज्ञापन ने यह स्पष्ट किया कि सामाजिक जागरूकता और दबाव से ही न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है। समाजजन और युवा विशेष रूप से इस मामले में सक्रिय हैं, ताकि पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय और सुरक्षा मिल सके।

 

अन्याय के खिलाफ जागरूकता और सामाजिक संदेश

खाजूवाला दलित बालिका मामला समाज को यह सिखाता है कि बच्चों और कमजोर वर्ग की सुरक्षा में सख्त कानून और जागरूक नागरिकता की आवश्यकता है। इस प्रकार के मामलों में समाज का दबाव, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और मीडिया का सहयोग न्याय की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि जनता केवल न्याय की मांग नहीं करती, बल्कि सुरक्षा और सामाजिक चेतना के लिए भी सजग है।

 

न्याय, सुरक्षा और सामाजिक चेतना

खाजूवाला दलित बालिका मामला पूरे समाज के लिए एक चेतावनी और संदेश है। पूर्व मंत्री और स्थानीय नेताओं के नेतृत्व में प्रदर्शन ने स्पष्ट किया कि अन्याय, अपराध और सामाजिक असुरक्षा के खिलाफ समाज सजग और संगठित है। इस मामले में निष्पक्ष जांच, दोषियों की सख्त कार्रवाई, पीड़ित परिवार को आर्थिक और सामाजिक समर्थन प्रदान करना बेहद आवश्यक है। यह घटना समाज में न्याय, सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने का अवसर है।

 

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विराट हिंदू सम्मेलन महावीर नगर 2026: अनिल जैन बोले—एकात्म और समरस समाज का निर्माण ही संघ का लक्ष्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशिष्ट सम्मान समारोह

कोटा, संवाददाता: तेजपाल सिंह बग्गा

 

कोटा के महावीर नगर तृतीय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विराट हिंदू सम्मेलन महावीर नगर का आयोजन किया गया। सम्मेलन में सेक्टर 1, 2, 3, 4, 8 एवं 10 के सर्व हिंदू समाज के सदस्य शामिल हुए। यह कार्यक्रम समाज में एकता, जागरूकता और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक रहा।

 

विभिन्न सेक्टरों के सर्व हिंदू समाज की भागीदारी

सम्मेलन में शहर की अलग-अलग बस्तियों से लोगों ने भाग लिया। सभी उपस्थित बंधु समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए और समाज को एकजुट और संगठित करने का संदेश लिया। सम्मेलन में लगभग दो दर्जन विशिष्ट व्यक्तियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।

 

शोभायात्रा: महापुरुषों की झांकियां और स्वागत

सम्मेलन में शोभायात्रा का आयोजन भी किया गया, जो बस्ती के मंदिरों से प्रारंभ हुई। इस शोभायात्रा में शिवाजी, रानी लक्ष्मीबाई, भारत माता, स्वामी विवेकानंद, सरदार भगत सिंह, राधा-कृष्ण की झांकियां मुख्य आकर्षण रहीं। सभी बंधुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए। शोभायात्रा ने स्थानीय जनता में उत्साह और संस्कृति के प्रति प्रेम का भाव जगाया।

 

मंचीय कार्यक्रम: गणेश वंदना, हनुमान चालीसा और नृत्य

मंच पर गणेश वंदना, सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ और नृत्य प्रस्तुति का आयोजन हुआ। प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम ने युवाओं और बुजुर्गों दोनों को सांस्कृतिक समरसता का अनुभव दिया।

 

नन्हे-मुन्ने बालकों के कराटे, जूडो और तलवारबाजी प्रदर्शन

नन्हे-मुन्ने बालक और बालिकाओं ने जूड़ो, कराटे, तलवारबाजी और नृयुद्ध का प्रदर्शन किया। इससे बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्रीय चेतना का संदेश गया। उपस्थित समाज के बंधु बच्चों के साहस और कौशल देखकर अत्यंत प्रभावित हुए।

 

हरदोल व्यायामशाला का मल्लखंब प्रदर्शन

हरदोल व्यायामशाला के द्वारा प्रस्तुत मल्लखंब प्रदर्शन ने सम्मेलन में रोमांच का नया स्तर जोड़ दिया। दर्शक जन समुदाय ने तालियों और उत्साह से प्रदर्शन की सराहना की। मल्लखंब प्रदर्शन ने भारतीय शारीरिक शिक्षा और परंपरा की महत्ता को भी उजागर किया।

 

मुख्य वक्ता अनिल जैन का संदेश

सम्मेलन में मुख्य वक्ता अनिल कुमार जैन ने उपस्थित जन समुदाय को समरस होकर संगठित होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारा देश अनेक समृद्धियों से युक्त होने के बावजूद लंबे समय तक गुलाम रहा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 100 वर्षों से समाज में जागृति और संगठन के लिए कार्य कर रहा है।

 

समाज परिवर्तन और समरसता पर जोर

अनिल जैन ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक स्वदेशी भावना, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक शिष्टाचार के माध्यम से समाज को जागृत कर रहे हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे अपने परिवार और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

 

प्रतिभाओं और भामाशाहों का सम्मान

सम्मेलन में स्थानीय प्रतिभाओं, पर्यावरण प्रेमियों, कवियों, उत्कृष्ट खिलाड़ियों, रक्तदाताओं, मंदिर पुजारियों और भामाशाहों का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह ने समाज में योगदान और सेवा भावना का महत्व प्रदर्शित किया। प्रतिभाओं को सम्मानित कर उन्हें आगे प्रेरित करने का संदेश भी दिया गया।

 

कार्यक्रम का समापन और भारत माता की आरती

सम्मेलन का समापन भारत माता की सामूहिक आरती के साथ हुआ। सभी बंधुओं ने मिलकर आरती में भाग लिया और एकात्म और समरस समाज के निर्माण का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने समाज में एकता, सेवा और संस्कृति के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य किया।

 

संघ के 100 वर्षों की साधना और समाज में योगदान

विराट हिंदू सम्मेलन महावीर नगर ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य केवल संगठन नहीं, बल्कि समाज में एकता, जागरूकता और समरसता का निर्माण है। सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल प्रदर्शन और सम्मान समारोह ने यह साबित किया कि समाज में सामूहिक चेतना और सेवा भावना कितनी महत्वपूर्ण है।

 

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डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा का कोटा से बड़ा बयान | केंद्रीय बजट में राजस्थान को मिला लाभ, कोचिंग पर GST पर सफाई

कोटा, संवाददाता: तेजपाल सिंह बग्गा

 

कोटा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा कोटा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोचिंग संस्थानों पर जीएसटी को लेकर उन्होंने विस्तार से जानकारी दी। बैरवा ने कहा कि कोचिंग संस्थान एक तरह का व्यवसाय है और स्कूलों की तरह नो लॉस नो प्रॉफिट थ्योरी पर काम नहीं करता। इसलिए इस पर जीएसटी लागू होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी बजट में इस पर जीएसटी कम करने का प्रयास किया जाएगा ताकि छात्रों और संस्थानों दोनों को लाभ मिल सके।

 

कोटा में प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें

उप मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कोटा में कोचिंग क्षेत्र में कुछ विवाद और घटनाओं के कारण छात्रों की संख्या में कमी आई है। इसी वजह से केंद्र सरकार के बजट में कोचिंग संस्थानों को लेकर बिल लाया गया। डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा कोटा प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने के लिए इस तरह के सुधार जरूरी हैं।

 

बजट में राजस्थान को मिले लाभ

बैरवा ने बताया कि इस बार केंद्रीय बजट में राजस्थान के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। राज्य के आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलेगी। टियर 2 और 3 के शहर, जिनकी आबादी 5 लाख से अधिक है, उनका विकास होगा। उन्होंने विशेष रूप से जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर और बीकानेर का नाम लिया, जिनमें इन योजनाओं से सीधा लाभ मिलेगा। राज्य को बजट में 95,600 करोड़ रुपये मिलेंगे।

 

टियर 2 और 3 शहरों का आधारभूत ढांचा मजबूत

बैरवा ने कहा कि छोटे और मझौले शहरों में सड़क, पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में काफी सुधार होगा। यह कदम प्रदेश के विकास में एक बड़ा बदलाव लाएगा। डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा कोटा प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात पर जोर दिया गया कि टियर 2 और 3 शहरों का विकास राज्य की समग्र प्रगति के लिए आवश्यक है।

 

गर्ल्स हॉस्टल और टेक्सटाइल उद्योग को फायदा

बजट में 41 जिलों में गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा भीलवाड़ा, जयपुर और जोधपुर के टेक्सटाइल उद्योगों को आर्थिक और तकनीकी सहयोग मिलेगा। बैरवा ने कहा कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवाओं को अपनी पढ़ाई और रोजगार के लिए शहरों में बेहतर अवसर मिलेंगे।

 

भाजपा में अनुशासन और शिकायतों पर बैरवा का दृष्टिकोण

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उप मुख्यमंत्री ने अंता उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी मोरपाल सुमन द्वारा पार्टी नेताओं पर आरोप लगाने पर भी अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस पत्र की जानकारी नहीं है। भाजपा में किसी भी शिकायत को अनुशासन समिति के पास भेजा जाता है और समिति की अनुशंसा के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष निर्णय लेते हैं।

 

भविष्य की योजनाओं और बजट के प्रभाव

बैरवा ने यह भी कहा कि आगामी बजट और योजनाओं से राजस्थान में शिक्षा, उद्योग और ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि कोचिंग संस्थानों पर जीएसटी को संतुलित करने और टियर 2-3 शहरों के विकास पर लगातार काम किया जाएगा। डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा कोटा प्रेस कॉन्फ्रेंस का संदेश साफ है कि राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से विकास की योजनाओं को साकार करने में जुटी है।

 

कोटा प्रेस कॉन्फ्रेंस से संदेश

कोटा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कोचिंग संस्थानों पर जीएसटी और बजट से जुड़े मुद्दे पर सरकार संवेदनशील है। राजस्थान के विकास और रोजगार, शिक्षा और उद्योग के क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रहे हैं। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस राज्य और आमजन को संदेश देती है कि डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा कोटा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बजट और जीएसटी जैसे मुद्दों पर सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट और पारदर्शी है।

 

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मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश के विरोध में कांग्रेस का जोरदार धरना | कोटा कलेक्ट्रेट पर ग्रामीण रोजगार बचाने की मांग

कोटा, संवाददाता: तेजपाल सिंह बग्गा

 

मनरेगा योजना देश के ग्रामीण रोजगार की रीढ़ मानी जाती है। हाल ही में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की योजनाएं और नीतियां मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश को बल दे रही हैं। कांग्रेस के अनुसार यह सिर्फ एक योजना को बंद करने का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों ग्रामीणों की आजीविका पर बड़ा संकट है। यही कारण है कि कोटा में कांग्रेस ने कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन कर इसे गंभीरता से उजागर किया।

 

कोटा कलेक्ट्रेट में कांग्रेस का जोरदार धरना

सोमवार दोपहर 12 बजे कोटा कलेक्ट्रेट परिसर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराया। नारेबाजी और हाथों में तख्तियों के साथ प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार के खिलाफ अपने गुस्से को जाहिर कर रहे थे। धरना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण रोजगार के संरक्षण और मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश के विरोध में सार्वजनिक ध्यान आकर्षित करना था।

 

शहर और देहात कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भागीदारी

धरने का नेतृत्व कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजन, शहर जिला अध्यक्ष राखी गौतम, और देहात जिला अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने किया। नेताओं ने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन और आत्मसम्मान की सुरक्षा भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस योजना को कमजोर करने का मतलब ग्रामीण भारत के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना है।

 

नेताओं के तीखे बयानों में सरकार पर आरोप

धरने को संबोधित करते हुए प्रहलाद गुंजन ने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांवों में काम के दिन घटाए जा रहे हैं, मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा और योजना के बजट में कटौती की जा रही है। नेताओं ने चेताया कि यह सिर्फ ग्रामीणों की आजीविका पर हमला नहीं, बल्कि पूरे देश के गरीब वर्ग को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।

 

ग्रामीण रोजगार और मनरेगा का महत्व

मनरेगा योजना के तहत ग्रामीणों को न्यूनतम रोजगार और वेतन की गारंटी मिलती है। योजना से न केवल बेरोजगारी कम हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश के कारण ग्रामीण मजबूर होकर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर होंगे, जिससे सामाजिक और आर्थिक असंतुलन पैदा होगा।

 

भाजपा सरकार के कदमों की आलोचना

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों के सहारे योजनाओं को कमजोर कर रही है। बजट कटौती, तकनीकी अड़चनें और भुगतान में देरी जैसी नीतियां सीधे तौर पर योजना को खत्म करने की दिशा में हैं। धरना प्रदर्शन में ग्रामीण और मजदूर वर्ग ने भी अपनी नाराजगी जताई और योजना की सुरक्षा की मांग की।

 

कांग्रेस का आंदोलन जारी रखने का ऐलान

कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश पूरी तरह रुक नहीं जाती, उनका संघर्ष जारी रहेगा। नेताओं ने चेताया कि आंदोलन को जिला स्तर से राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक बढ़ाया जाएगा। उनका कहना था कि सरकार की उदासीनता ग्रामीणों के लिए गंभीर खतरा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

 

भविष्य की राजनीति और ग्रामीण प्रतिक्रिया

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मनरेगा जैसे रोजगार योजनाओं को लेकर उठे विरोध प्रदर्शन का असर ग्रामीण वोट बैंक पर पड़ेगा। कोटा कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया कि मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन को प्रभावित करने वाला मुद्दा है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस प्रदर्शन और विरोध के बाद नीति में बदलाव करती है या नहीं।

 

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किशनगंज करंट से भैंस की मौत: अवैध बिजली कनेक्शन बना जानलेवा, विद्युत विभाग की लापरवाही उजागर

बारां, संवाददाता: मदनलाल शाक्यवाल 

 

किशनगंज क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक और दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां किशनगंज करंट से भैंस की मौत हो गई। यह हादसा रानी बडोद स्थित महिला बाल विकास कार्यालय के पास हुआ, जहां एक बिजली के खंभे से फैल रहे करंट की चपेट में आने से भैंस ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह घटना न केवल पशुधन की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि विद्युत व्यवस्था में व्याप्त लापरवाही को भी उजागर करती है।

 

अवैध बिजली कनेक्शन कैसे बना मौत का कारण

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिस खंभे से करंट फैला, वह बिजली विभाग की पुरानी लाइन का हिस्सा था। इस खंभे पर खेल भरने के उद्देश्य से अवैध तरीके से आंकड़े (तार/हुक) डाले गए थे। इन्हीं अवैध आंकड़ों में से एक नीचे की ओर झूल रहा था, जिसमें करंट प्रवाहित हो रहा था। जब भैंस उस स्थान के पास पहुंची, तो वह सीधे करंट की चपेट में आ गई, जिससे किशनगंज करंट से भैंस की मौत हो गई।

 

महिला बाल विकास कार्यालय के पास हादसा

यह हादसा जिस स्थान पर हुआ, वह कोई सुनसान इलाका नहीं, बल्कि महिला बाल विकास कार्यालय के पास का क्षेत्र है, जहां आमजन, महिलाएं और बच्चे अक्सर आते-जाते रहते हैं। ऐसे सार्वजनिक स्थान पर खुले करंट का फैलना प्रशासन और बिजली विभाग दोनों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि उसी समय कोई व्यक्ति या बच्चा वहां मौजूद होता, तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था।

 

भैंस मालिक पर टूटा दुखों का पहाड़

घटना की सूचना मिलते ही भैंस मालिक नंदलाल धोबी मौके पर पहुंचे। अपनी आंखों के सामने पालतू पशु को मृत अवस्था में देखकर उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि भैंस उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन थी। किशनगंज करंट से भैंस की मौत ने एक गरीब परिवार को आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से गहरा झटका दिया है।

 

विद्युत विभाग का पक्ष और जांच प्रक्रिया

घटना के बाद किशनगंज विद्युत निगम के सहायक अभियंता से जानकारी ली गई। सहायक अभियंता सतपाल मिला ने बताया कि यह बिजली विभाग की पुरानी लाइन है और खंभे पर अवैध आंकड़े डाले गए थे। उन्होंने कहा कि घटना की जांच की जा रही है और दोषियों की पहचान के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सवाल यह उठता है कि यदि समय रहते अवैध कनेक्शन हटाए जाते, तो किशनगंज करंट से भैंस की मौत जैसी घटना टाली जा सकती थी।

 

आमजन और पशुधन की सुरक्षा पर सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अवैध बिजली कनेक्शन केवल चोरी का मामला नहीं, बल्कि जानलेवा खतरा भी हैं। खुले तार और लटकते आंकड़े किसी भी समय बड़े हादसे को जन्म दे सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले भी कई बार बिजली खंभों पर अवैध कनेक्शन की शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

 

अवैध कनेक्शन: बढ़ता खतरा

राजस्थान के कई ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में खंभों पर अवैध आंकड़े डालकर बिजली का उपयोग आम बात बनती जा रही है। यह न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इंसानों और पशुओं दोनों के लिए खतरा पैदा करता है। किशनगंज करंट से भैंस की मौत इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि लापरवाही किस तरह निर्दोष जान ले सकती है।

 

जिम्मेदारी तय होगी या मामला दबेगा?

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस घटना में जिम्मेदारी तय की जाएगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि: अवैध बिजली कनेक्शन तुरंत हटाए जाएं, खंभों और तारों की नियमित जांच हो, भैंस मालिक को उचित मुआवजा दिया जाए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में किशनगंज करंट से भैंस की मौत जैसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।

 

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डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड में तब्दील: गोवंश की मौत, प्रशासनिक लापरवाही से बढ़ा जनस्वास्थ्य संकट

टोंक, संवाददाता: अशोक सैनी 

 

डिग्गी नगरपालिका क्षेत्र में स्थित चरागाह भूमि का उद्देश्य गोवंश को सुरक्षित, स्वच्छ और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराना था। यह भूमि वर्षों से ग्रामीणों और पशुपालकों के लिए जीवनरेखा रही है। लेकिन आज वही भूमि डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड बनकर प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुकी है। नगरपालिका द्वारा नियमित रूप से शहर का कचरा, प्लास्टिक, गंदगी और सड़ा-गला अपशिष्ट इसी चरागाह में डाला जा रहा है, जिससे इसका मूल स्वरूप पूरी तरह नष्ट हो चुका है।

 

कचरा डंपिंग ग्राउंड में तब्दील होती चरागाह भूमि

स्थानीय लोगों के अनुसार डिग्गी चरागाह में रोजाना ट्रैक्टर-ट्रॉली भरकर कचरा डाला जाता है। प्लास्टिक, पॉलीथिन, घरेलू कचरा और अन्य अपशिष्ट ने पूरे क्षेत्र को ढक लिया है। डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड बनने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि पशुओं के चरने योग्य भूमि भी समाप्त होती जा रही है। चरागाह की जगह अब दुर्गंध और गंदगी का अंबार दिखाई देता है।

 

गोवंश के जीवन पर मंडराता संकट

चरागाह में रहने को मजबूर गोवंश कचरे के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं। चारे की कमी के कारण वे प्लास्टिक और जहरीला कचरा खाने लगते हैं, जिससे गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई गोवंश कमजोरी, पेट की बीमारी और संक्रमण से जूझते हुए दम तोड़ चुके हैं। डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड गोवंश के लिए धीरे-धीरे मौत का मैदान बनता जा रहा है।

 

मृत गोवंश और आवारा श्वानों का भयावह दृश्य

स्थिति तब और भयावह हो गई जब चरागाह क्षेत्र में कई गोवंश मृत अवस्था में पड़े मिले। मृत पशुओं को समय पर हटाने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके चलते आवारा श्वान खुलेआम मृत गोवंश को नोचते नजर आए। यह दृश्य न केवल अमानवीय है, बल्कि धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को भी आहत करता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड जल्द ही गोवंश कब्रगाह में बदल जाएगा।

 

प्रशासन और पशुपालन विभाग की भूमिका

स्थानीय लोगों ने कई बार डिग्गी नगरपालिका और पशुपालन विभाग को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया। लिखित शिकायतें, मौखिक जानकारी और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। न तो कचरा डालना बंद हुआ और न ही गोवंश के इलाज की कोई ठोस व्यवस्था की गई। प्रशासन की यह उदासीनता डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड की समस्या को और गहरा रही है।

 

आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा

चरागाह में फैले कचरे से मच्छर, मक्खियां और अन्य रोग फैलाने वाले कीट तेजी से पनप रहे हैं। आसपास के गांवों और बस्तियों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं। डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड केवल गोवंश ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुका है।

 

ग्रामीणों की मांग और चेतावनी

ग्रामीणों और गौभक्तों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि: चरागाह में कचरा डालना तुरंत बंद किया जाए, मृत गोवंश के मामलों की जांच हो, दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, गोवंश के लिए चारा, पानी और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए, चरागाह भूमि का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए , ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

 

क्या जिम्मेदारों की नींद खुलेगी?

डिग्गी का चरागाह केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि गोवंश और ग्रामीण जीवन का आधार है। लेकिन आज डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड बनकर प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत उदाहरण बन चुका है। अब देखना यह है कि यह खबर भी कचरे के ढेर में दब जाएगी या प्रशासन सच में जागकर कार्रवाई करेगा।

 

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टोंक बजट 2026: पूर्व विधायक अजीत सिंह मेहता का बड़ा बयान, युवाओं और महिलाओं के लिए अहम

टोंक, संवाददाता: केशव राज सैन

 

राजस्थान के टोंक जिले में केंद्रीय बजट 2026 को लेकर चर्चा तेज है। टोंक के पूर्व विधायक अजीत सिंह मेहता ने इस बजट पर महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ की हैं। उन्होंने इसे आने वाले समय के लिए दूरगामी और समावेशी बजट बताया। बजट 2026 के तहत युवाओं के रोजगार, महिलाओं के सशक्तिकरण और समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। अजीत सिंह मेहता के अनुसार यह बजट केवल वर्तमान नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

 

पूर्व विधायक का बयान

पूर्व विधायक अजीत सिंह मेहता ने कहा कि “2047 को देखते हुए यह बजट दूरगामी है।” उन्होंने बताया कि बजट की सोच ऐसे तैयार की गई है कि आने वाले वर्षों में युवाओं और महिलाओं के लिए स्थायी लाभ सुनिश्चित हो सके। मेहता ने युवाओं और महिलाओं पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बजट न केवल रोजगार के अवसर पैदा करेगा, बल्कि समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए भी योजनाएँ शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह बजट केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसमें शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक समरसता को प्राथमिकता दी गई है।

 

बजट के प्रमुख लाभ

अजीत सिंह मेहता ने बताया कि टोंक बजट 2026 में युवाओं के लिए रोजगार सृजन की योजना, महिलाओं के लिए आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण, और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। बजट में हर वर्ग को लाभ पहुँचाने की कोशिश की गई है। यह योजनाएँ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, व्यवसायियों और युवाओं के लिए अवसर प्रदान करेंगी। मेहता के अनुसार, बजट का दूरगामी दृष्टिकोण इसे आने वाले दशकों के लिए भी प्रासंगिक बनाता है।

 

युवाओं और रोजगार पर प्रभाव

पूर्व विधायक ने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार सृजन के अवसर बढ़ेंगे। नई नीतियाँ और योजनाएँ युवाओं को स्वरोजगार और सरकारी नौकरी दोनों के विकल्प प्रदान करेंगी। बजट में शिक्षा और कौशल विकास के लिए विशेष प्रावधान हैं। इससे युवा अपने पेशेवर कौशल को सुधार सकेंगे और भविष्य के लिए तैयार होंगे। मेहता ने युवाओं से अपील की कि वे बजट के अवसरों का लाभ उठाएँ और समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान दें।

 

महिलाओं और समाजिक वर्गों के लिए संदेश

अजीत सिंह मेहता ने महिलाओं के सशक्तिकरण को बजट का प्रमुख उद्देश्य बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से सशक्त बनाने के लिए योजनाएँ शामिल की गई हैं। इसके अलावा, बजट में समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण के लिए भी योजनाएँ शामिल हैं। गरीब, मध्यम वर्ग और व्यवसायियों सभी के लिए सुविधाएँ सुनिश्चित की गई हैं। मेहता ने यह भी कहा कि बजट के तहत सामाजिक समरसता और संवेदनशीलता को बढ़ावा मिलेगा।

 

टोंक बजट 2026 को लेकर पूर्व विधायक अजीत सिंह मेहता की राय है कि यह बजट भविष्य की सोच के साथ तैयार किया गया है। यह युवाओं, महिलाओं और समाज के सभी वर्गों के लिए दूरगामी लाभ देने वाला है। बजट में रोजगार, शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक कल्याण के लिए योजनाएँ शामिल हैं। यह बजट आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से टोंक और पूरे राज्य के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। भविष्य में टोंक जिले के युवाओं और महिलाओं को इस बजट से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाकर अपने और समाज के विकास में योगदान देना चाहिए।

 

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विराट हिंदू सम्मेलन बकानी: 108 कुंडीय यज्ञ से कलश यात्रा और विशाल धर्म सभा का भव्य आयोजन

झालावाड़, संवाददाता: रमेश शर्मा 

 

बकानी नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस आयोजन में पूरे नगर और आसपास के क्षेत्रों के हिंदू समाज के लोगों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य हिंदू एकता, राष्ट्रीय हित, सामाजिक समरसता और संस्कारों के संरक्षण पर बल देना था। इस अवसर पर नगर के प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थलों को विशेष रूप से सजाया गया। व्यापार संघ ने समस्त प्रतिष्ठान पूरे दिन बंद रखे, जिससे सभी वर्गों के लोगों को धर्म सभा और भंडारे में सहभागिता का अवसर मिला।

 

108 कुंडीय यज्ञ से हुआ शुभारंभ

विराट हिंदू सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ 108 कुंडीय यज्ञ से हुआ। यह यज्ञ स्वामी रामेश्वर आश्रम और आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय बकानी में आयोजित किया गया। यज्ञ में बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग उपस्थित थे, जिन्होंने आहुतियां प्रदान कर धर्मिक परंपरा का पालन किया। यज्ञ के माध्यम से आयोजन का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व दर्शाया गया, जिससे सभी उपस्थित लोग धार्मिक चेतना और श्रद्धा के भाव से जुड़ सके।

 

भव्य कलश यात्रा और शोभायात्रा

यज्ञ के पश्चात 251 महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर भव्य कलश यात्रा निकाली। यह शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर बस स्टैंड परिसर तक गई। नगरवासियों और विभिन्न संगठनों ने जगह-जगह तोरण स्वागत द्वार बनाकर और पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। बैंड बाजे और डीजे साउंड के साथ यह यात्रा नगर में उत्सव और धार्मिक ऊर्जा का प्रतीक बन गई।

 

विशाल धर्म सभा में मुख्य संदेश

बस स्टैंड परिसर में आयोजित विशाल धर्म सभा को कामखेड़ा सरकार, रोहित नागर, संत श्री रामेश्वर, और भारतीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रवक्ता मुख्य वक्ताओं ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने हिंदू एकता, राष्ट्रीय हित, सामाजिक समरसता और संस्कारों के संरक्षण पर जोर दिया। युवाओं से सोशल मीडिया के माध्यम से सकारात्मक सोच अपनाने का आह्वान किया गया। धर्म सभा में यह भी बताया गया कि संत समाज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज को जोड़ने का कार्य लगातार कर रहे हैं। ऊंच-नीच, जाति-पाति भेदभाव और छुआछूत को त्यागकर एकजुट और संगठित रहने पर बल दिया गया।

 

बालिकाओं और युवाओं के लिए विशेष संदेश

वक्ताओं ने बेटियों को देश का गौरव बताया और उनके सम्मान में सशक्तिकरण का संदेश दिया। माता बहनों से अपील की गई कि बच्चों का जन्म दिवस केक काट कर नहीं, बल्कि मंदिर जाकर दीपक जलाकर और गौ माता को हरा चारा डालकर मनाया जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय हिंदू संस्कृति में केक काटने का प्रावधान नहीं है। युवाओं को अंग्रेजी शिक्षा पद्धति से हटकर संस्कारवान विद्यालयों में शिक्षा लेने और अच्छे संस्कार विकसित करने का संदेश दिया गया। भगवा रंग को उत्कृष्टता का प्रतीक बताते हुए देश को वैभवशाली बनाने पर बल दिया गया।

 

सामाजिक समरसता और संस्कारों पर जोर

धर्म सभा में वक्ताओं ने समाज में एकता और समरसता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जाति-पाति, ऊंच-नीच और भेदभाव को त्यागने की प्रेरणा दी। सामाजिक जीवन में संस्कारों का महत्व और हिंदू धर्म की प्राचीन परंपराओं का पालन करने की शिक्षा दी गई। युवाओं और बच्चों को सामाजिक जिम्मेदारी, संगठन और देशभक्ति के मूल्यों के प्रति जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

 

भंडारा और समाजिक सहभागिता

इस अवसर पर सर्व हिंदू समाज द्वारा भव्य भंडारा का आयोजन किया गया। हजारों नगरवासियों ने समाज के सभी वर्गों की सहभागिता के अंतर्गत भोजन ग्रहण किया। व्यापार संघ और स्थानीय संगठन पूरे दिन व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रखकर सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में समर्थन प्रदान किया। यह आयोजन नगरवासियों के बीच धार्मिक और सामाजिक समरसता को बढ़ाने में सफल रहा।

 

विराट हिंदू सम्मेलन बकानी ने धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से नगर और आसपास के क्षेत्रों में एक सकारात्मक संदेश दिया। 108 कुंडीय यज्ञ, भव्य कलश यात्रा, धर्म सभा और भंडारे के माध्यम से समाज में हिंदू एकता, संस्कार और राष्ट्रीय चेतना को बल मिला। इस तरह के आयोजन समाज को जोड़ने, युवाओं को जागरूक करने और संस्कारों को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

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