21 नवंबर 2025 को मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। आज चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित रहेंगे जिनके स्वामी ग्रह मंगल देव हैं। इस दिन अनुराधा नक्षत्र और अतिगंदा योग का संयोग बन रहा है, जो कई कार्यों में शुभ फल प्रदान करता है। शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है और आज का अभिजीत मुहूर्त 11:42 से 12:24 तक अत्यंत शुभ बताया गया है। राहुकाल सुबह 10:44 से 12:03 तक रहेगा, इस दौरान किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए। पंचांग के अनुसार आज का दिन धार्मिक कार्यों, यात्रा योजना और नए कार्यों के आरंभ के लिए सामान्य से शुभ माना गया है।
21 नवंबर 2025 का पूरा पंचांग
तिथि – प्रतिपदा (14:46 तक)
नक्षत्र – अनुराधा (13:48 तक)
योग – अतिगंदा (10:40 तक)
प्रथम करण – बावा (14:46 तक)
द्वितीय करण – बालवा (27:59 तक)
पक्ष – शुक्ल पक्ष
वार – शुक्रवार
सूर्योदय – 06:47 बजे
सूर्यास्त – 17:19 बजे
चंद्रमा – वृश्चिक राशि में
राहुकाल – 10:44 से 12:03 बजे तक
विक्रमी संवत – 2082
शक संवत – 1947 विश्वावसु
मास – मार्गशीर्ष
शुभ मुहूर्त – अभिजीत (11:42 से 12:24 बजे तक)
पंचांग और उसके पांच अंग: जानें पूरा विवरण
पंचांग को वैदिक पंचांग या हिंदू कैलेंडर भी कहा जाता है। यह समय और काल की सटीक गणना प्रस्तुत करता है। पंचांग पांच प्रमुख अंगों से मिलकर बनता है—तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण। इन पाँचों की स्थिति और गति मानव जीवन के कार्यों, शुभ-अशुभ समय, ग्रहों की चाल और मुहूर्त निर्धारण में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
तिथि क्या होती है?
चंद्रमा के सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ने में जो समय लगता है उसे तिथि कहा जाता है। एक माह में 30 तिथियां होती हैं जिन्हें दो पक्षों—शुक्ल और कृष्ण पक्ष—में बांटा जाता है। शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है। तिथि के नाम हैं—प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या/पूर्णिमा।
नक्षत्र का महत्व
आकाश में स्थित तारा समूह को नक्षत्र कहा जाता है। कुल 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नक्षत्र का देवता तथा स्वामी ग्रह अलग-अलग होते हैं। 27 नक्षत्रों के नाम हैं—अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती।
वार (दिवस) की गणना
एक सप्ताह में सात वार होते हैं– सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार। प्रत्येक वार एक ग्रह से संबंधित माना जाता है और इनका प्रभाव दैनिक जीवन और कर्मों पर पड़ता है।
योग: सूर्य-चंद्र की विशेष दूरी
सूर्य और चंद्रमा की विशिष्ट दूरी से जो 27 योग बनते हैं उन्हें योग कहा जाता है। इनके नाम हैं—विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यातीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इन्द्र और वैधृति।
करण: तिथि का आधा भाग
एक तिथि दो करणों में विभाजित होती है। कुल 11 करण होते हैं—बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किस्तुघ्न। विष्टि करण को भद्रा कहा जाता है और भद्रा में शुभ कार्य नहीं किए जाते।
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