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93 साल में भारत की शर्मनाक हार

गुवाहाटी टेस्ट में भारतीय क्रिकेट टीम को ऐसी हार मिली, जिसकी उम्मीद शायद किसी ने नहीं की थी। दक्षिण अफ्रीका ने भारत को 408 रन के विशाल अंतर से हराकर 93 वर्षों के इतिहास में भारत की सबसे बड़ी टेस्ट हार दर्ज कराई। यह हार जहां भारतीय टीम की कमजोर बल्लेबाज़ी को उजागर करती है, वहीं दक्षिण अफ्रीका की आक्रामक रणनीति और गेंदबाज़ी की दबदबा भी दर्शाती है।मैच के आखिरी दिन भारतीय बल्लेबाज़ एक-एक करके पवेलियन लौटते गए।रवींद्र जडेजा को छोड़कर कोई भी भारतीय बल्लेबाज़ 20 रन का आंकड़ा भी नहीं छू सका।

  • टॉप ऑर्डर ध्वस्त

  • मिडिल ऑर्डर फ्लॉप

  • लोअर ऑर्डर बिना संघर्ष ढेर

दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाज़ों ने भारतीय बल्लेबाज़ी पर पूरी तरह दबदबा बनाए रखा। गेंद स्विंग हो रही थी, उछाल मिल रहा था और भारतीय बल्लेबाज़ तकनीक, निर्णय और आत्मविश्वास सभी स्तरों पर बिखरते दिखे।

 

हार के बीच दक्षिण अफ्रीकी कोच का शर्मनाक बयान—“चाहता था भारत घुटनों पर रेंगता”

मैच के बाद जहां भारतीय समर्थक और क्रिकेट एक्सपर्ट टीम के प्रदर्शन से निराश दिखे, वहीं दक्षिण अफ्रीका के मुख्य कोच शुकरी कोनराड ने एक विवादित बयान देकर माहौल और गर्मा दिया।

उन्होंने कहा:

“मैं चाहता था कि भारत घुटनों पर रेंगता।“

यह बयान भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए बेहद अपमानजनक, गैरजिम्मेदाराना और खेलभावना के विपरीत माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार SA कोच की आलोचना कर रहे हैं और इसे भारतीय क्रिकेट के इतिहास का सबसे अवमाननापूर्ण बयान बता रहे हैं।

 

फैंस और एक्सपर्ट्स में आक्रोश—बयान को बताया शर्मनाक

यह बयान सामने आने के बाद क्रिकेट समुदाय में जमकर आक्रोश फैल गया।भारतीय फैंस ने कहा कि खेल सम्मान का मंच होता है और प्रतिद्वंद्वी को नीचा दिखाना किसी भी कोच की गरिमा के खिलाफ है।कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी इसे स्पोर्ट्समैनशिप के विरुद्ध बताया और ICC को इस पर संज्ञान लेने की मांग की।

 

SA कप्तान टेम्बा बावुमा ने भी कोच से दूरी बनाई, कहा—“वे 60 के होने वाले हैं, बयान पर सोचें”

बाद में जब मीडिया ने दक्षिण अफ्रीकी कप्तान टेम्बा बावुमा से कोच के विवादित बयान पर सवाल किया तो उन्होंने भी इसे संतुलित तरीके से खारिज किया।

बावुमा ने कहा:

“शुकरी 60 साल के होने वाले हैं… और वो अपने बयान पर गौर करेंगे।”

उनके इस जवाब से साफ है कि दक्षिण अफ्रीका की टीम भी कोच के बयान से पूरी तरह सहमत नहीं है। बावुमा ने आगे कहा कि मैच जीतना एक टीम का लक्ष्य होता है, लेकिन विरोधी का अपमान करना कभी खेल संस्कृति नहीं हो सकता।

 

भारतीय टीम के लिए आत्मनिरीक्षण का समय

गुवाहाटी टेस्ट ने भारतीय क्रिकेट के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

  • बल्लेबाज़ी की लगातार विफलता

  • विदेशी पिचों पर तकनीकी कमजोरी

  • टीम संयोजन में बार-बार बदलाव

  • मानसिक मजबूती की कमी

आने वाली टेस्ट सीरीज़ के लिए भारतीय टीम को अपनी रणनीति और मानसिकता दोनों पर गंभीरता से काम करना होगा।

 

दक्षिण अफ्रीका को मिली ऐतिहासिक जीत—पर विवाद ने कम कर दी चमक

दक्षिण अफ्रीका ने यह मैच शानदार तरीके से अपने नाम किया, लेकिन कोच के अपमानजनक बयान ने उनकी इस जीत की चमक को कम कर दिया।विवाद के कारण क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान रणनीति और प्रदर्शन की बजाय बयानबाज़ी की ओर खिंच गया है।

 

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